पृथ्वी के बारे में जानकारी – Planet earth in hindi

पुरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन है। इसकी एक खास वजह यह है की पृथ्वी पर जीवन के लिए सभी तत्त्व मौजूद है।

फिर भले ही वो वायुमंडल हो, ओज़ोन स्तर हो, पानी हो या ऑक्सिजन हो।

दूसरे ग्रहो पर यह सब नही मिलता।

जैसे की बुध ग्रह और शूक्र का ज्यादा तापमान, शनि और गुरु ग्रह का गैस बंधारण, युरेनस और अरुण ग्रह का सूर्यवसे अंतर कक्षा।

लेकिन पृथ्वी पर सब हमे एक साथ मिल जाता है।

तो चलिये जानते है हमारी प्यारी पृथ्वी को।

About earth in hindi

पृथ्वी सौरमंडल का तीसरा ग्रह है जो बुध और शूक्र के बाद आता है। बाकी ग्रहो की तरह पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करती है। सूर्य से पृथ्वी की दुरी 14.9 करोड़ किलोमीटर है। इतनी ज्यादा दुरी होनी की वजह से सूर्य प्रकाश को भी पृथ्वी की सतह पर पहुँचने में 8 मिनिट लग जाते है।

सौरमंडल के ग्रहो के बीच की दुरी को नापने के लिए km एकम ज्यादा कठिन बन जाता है वही दूसरी और प्रकाश वर्ष एकम बहोत बड़ा है।

इसीलिये एक नये एकम astronomical unit को लाया गया है। सूर्य और पृथ्वी के बीच के अंतर को 1 AU कहा जाता है।

पृथ्वी सूर्य से जिस दुरी पर है उसे goldik zone कहा जाता है, इस दुरी पर सूर्य का तापमान पृथ्वी की सतह पर पानी को बन्ये रखने में मदद करता है।

अब आते है पृथ्वी के आकर पर।

हमारी पृथ्वी की त्रिज्या 6,300 किलोमीटर है। इतने बड़े आकर के साथ पृथ्वी सौरमंडल का पांचवा बड़ा ग्रह बना जाता है।

पृथ्वी का आकार पूरी तरह से गोल ना होकर अंडाकार है। हमारी पृथ्वी तीन स्थलीय ग्रह बुध, शूक्र और मंगल से बड़ी है, लेकिन गुरु, और शनि ग्रह से बहोत छोटी।

पृथ्वी स्थलीय ग्रह है। यह पथ्थर और धातु से बनी है। ना की शनि और गुरु की तरह गैस से। स्थलीय ग्रह की वजह से इसका द्र्व्यमान बहोत ज्यादा बढ जाता है।

इसी वजह से इसकी घनता सौरमंडल में सारे ग्रहो से सबसे ज्यादा है।

इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते है कि गुर ग्रह का कद पृथ्वी से 1300 गुना ज्यादा है जब की द्र्व्यमान सिर्फ 320 गुना ही ज्यादा।

Orbit of earth

पृथ्वी को अपनी धरि पर एक चक्र पूरा करने में 23.9 घँटे लगते है। जिसे एक दिन माना जाता है। पर हम सामान्य जीवन के लिए 24 घँटे के समय को दर्शाते है।

वही सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 365.25 दिन लगा जाते है। पृथ्वी का सूर्य के आसपास घूमने का पथ अंडाकार है। और इस पथ पर वो 1,07,826 किलोमीटर प्रति घँटे की गति से आगे बढ़ रही है।

हर साल बढ़ता दिन का यह चौथा भाग (0.25) चार साल में एक दिन को बढ़ा देता है।

इसीलिये चार साल बाद एक साल ऐसा आता है जिनमे 366 दीन होते है। यह एक दिन फेब्रुआरी के महीने में होता है इसी वजह से वो महीना 28 दिन का ना होकर 29 दिन का बन जाता है। इस साल को लिप वर्ष कहा जाता है।

हमारी पृथ्वी गोल आकार की है और यह अंतरिक्ष में थोड़ी सी जुकी हुई है। आप इस फोटो में देख सकते हो।

Image

यह जुकाव 23.46 डिग्री का है और इसी वजह से हम अलग अलग ऋतुओं का अनुभव कर पते है।

कभी शर्दी तो कभी गर्मी। कभी बसंत तो कभी पतझड़।

हमारे सुरमंडल में कुछ ऐसे ग्रह भी है जिनका जुकाव लगभग ना के बराबर है और वह आपको किसी भी ऋतु का अहसास नही होता।

Formation of earth in hindi

आज से लगभग 4.5 अरब साल पहले एक विशाल बादल में से नाब्युला का जन्म हुआ था। इसी नाब्युला का द्र्व्यमान गुरुत्वकर्षण बल के चलते केंद् में जमा होने लगा।

इस जगह सूर्य का निर्माण हुआ और जो बाकी का भाग बच गया उनमे से पत्थर और गैस के जमा होने से पृथ्वी की रचना हुई।

फिर समय के साथ गुरुत्वाकर्षण बल बल के चलते पृथ्वी अपना आकार लेने लगी। जैसे जैसे समय बीतता गया सतह, पर्वत और ज्वालामुखी भी बनने लगे।

इन्ही ज्वालामुखी और अंदर रहे गैस ने पानी की भाप के साथ मिलकर पृथ्वी के वायुमंडल का निर्माण किया। इसी तरह अस्तित्व में आयी हमारी प्यारी पृथ्वी।

चलिये अब बात करते है पृथ्वी के वायुमंडल के बारे में। जो बेहत ही खास है।

 

Atmosphere of earth

जीवन की दृष्टि से देखा जाए तो पृथ्वी का वायुमंडल सबसे श्रेष्ठ और उत्तम है। पृथ्वी के वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सिजन और 1% में बाकि के सारे वायु आये हुए है।

इसमें जीने के लिए ऑक्सिजन,उल्का को रोकने के लिए बहिर्मण्डल और सूर्य के रेडियेशन से बचाने के लिए ओज़ोन स्तर सब कुछ है।

चलिये इन स्तरों को एक एक करके जानते है।

Troposphere: यह स्तर सतह से लेकर 10 km की ऊंचाई तक फैला हुआ है। बादल और ऑक्सिजन ज्यादातर यही पाए जाते है।

Stratosphere: यह स्तर Troposphere के बाद 40 km ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसीमे ओज़ोन स्तर बना हुआ है जो हमे सूर्य से आने वाले हानिकारक किरणों से बचाता है।

यह ओज़ोन स्तर ऑक्सिजन से मिलकर बना हुआ होता है, लेकिन अफ़सोस प्रदूषण की वजह से यह स्तर अब कमजोर पड़ने लगा है। कई जगहों पर तो यह पूरी तरह से टूट ही गया है।

Mesosphere: वायुमंडल का यह स्तर Stratosphere के बाद 35 km ऊंचाई तक फ़ैला हुआ है। जब कोई उल्कापिंड पृथ्वी में प्रवेश करता है तो इस स्तर पर वो घर्षण की वजह स जलने लगता है।

जिससे पृथ्वी इन उल्कापिंड से बच जाती है। जिन ग्रहो के पास यह स्तर नही होता उनकी सतह पर भोटब्सरे गढ़े बने हुए होते है। बुध ग्रह को ही देख लो। ठीक यही हमारे चाँद के साथ भी है।

यहा का तापमान बहोत ठंडा होता है 90℃ के आसपास। साथ ही हवा भी पतली होती है जिससे हम वहा साँस नही ले सकते। (जैसे जैसे आप सतह से ऊपर जाओगे हवा और दबाव कम होता जाएगा)

Thermosphere: वायुमंडल का यह स्तर Mesosphere के बाद 1,000 km ऊंचाई तक फैला हुआ होता है। यहा हवा और वायु बहोत कम मात्रा में होते है।

लेकिन फिर भी यह स्तर बेहत खास है, क्योकि सूर्य से आने वाले विद्युत्त कण इस क्षेत्र में ठहर जाते है और पृथ्वी पर आने से रोकते है। इन्ही कण की वजह से वहाँ रंगीन प्रकाश दिखाई देता है जिसे हम aurora कहते है।

यह हमे उत्तर और दक्षिण ध्रुव पर देखने को मिलता है।

Exosphere: वायुमंडल का यह स्तर आखरी है। जो Thermosphere से 1,00,000 km की ऊंचाई तक फैला हुआ होता है।

इसमें लगभग ना के बराबर हवा और गैस होते है। साथ ही इसके आखरी भाग में पृथ्वी की हवा अंतरिक्ष में छूट रही होती है।

इस स्तर के आखरी छोर पर चंद्रमा की आधी दुरी बन जाती है।

अब चाँद की बात हुई है जान लेते है उसके बारे में भी।

Moon of earth

चाँद हमारी पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है। जो पृथ्वी की तुलना में चार गुना छोटा है

चाँद पृथ्वी की चारो और परिक्रमा करता है। पर यह tidely lock है। इससे चाँद की एक बाजु हमेशा पृथ्वी की तरफ रहती है जिसे near side कहते है।

ओर दूसरी अँधेरे में डूबी रहती है उसे far sode कहते है।

वैसे चाँद कैसे बना वो भी एक रहस्य ही है। कुछ रिसर्च के मुताबिक सौरमंडल के शुरूआती समय में एक बड़ा खगोलीय पिंड पृथ्वी से टकराया था, जिससे इसका कुछ द्र्व्यमान अंतरिक्ष में गिर गया और उसी मे से बना हमारा चाँद।

Surface and structure

पृथ्वी की बनावट बेहत अलग है। इसे हम दो भागों में बाँट सकते है। अंदर का भाग और बाहर का भाग।

अंदर के भाग में पृथ्वी का कोर आया हुआ है, जो लोहे और निकल से बना है और 2,400 km में फैला हुआ है। यहाँ का तापमान 5,400℃ तक का होता है, जो सूर्य की सतह से भी ज्यादा है।

हमारी पृथ्वी की सतह 71%पानी से ढंकी हुई है और सिर्फ 29% ही जमीन है। 71% में से 70% पानी समुद्र का है जो क्षारयुक्त है।

सिर्फ 1% पानी ही नदी, झील और तालाब के रूप में है, जो पिने योग्य है।

Magnetosphere

वैसे Magnetosphere के बारे में ज्यादा जानकरी का कोई मतलब नही है, लेकीन जब बात पृथ्वी की हो तो यह बेहत जरूरी है।

पृथ्वी के केंद्र में रहा प्रवाही धातु चुम्बकीय क्षेत्र को उतपन्न करता है। दोनों ध्रुव पर चुम्बकीय क्षेत्र को बनानै में मदद करते है जो पृथ्वी के चारो और फ़ैल जाता है।

सूर्य से आनेवाले विद्युत्त कण पृथ्वी के अंदर आने से वायुमंडल नष्ट होने लगता है। लेकिन इस चुम्बकिय क्षेत्र की वजह से वो पृथ्वी में प्रवेश नही कर सकते।

लेकिन फिर भी कुछ कण अंदर आ जाते है और अपनी ऊर्जा को वातावरण में छोड़ते है, जिससे अलग अलग रंग आसमान के दिखाई पड़ते है, इस घटना को arora कहते है।

Life and Future of earth in hindi

पृथ्वी के लिये जीवन बेहत खास विषय है।

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत तकरीबन 4 अरब साल पहले हुई थी। किसी केमिकल रिएक्शन को वजह से ऐसे अणु की रचना हुई जिसमें जीवन हो।

फिर यह अणु बढ़ता गया। इसमें से कोष और सूक्ष्म जीवन बनना शरू हुआ।

अभी के समय पृथ्वी पर इतना ज्यादा तापमान नही है, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता जाएगा वैश्विक तापमान
भी बढ़ता जाएगा।

कुछ अरब साल बाद सूर्य का ईंधन खत्म हो जाएगा और वो सुपरनोवा बनना शुरू हो जाएगा।

इसके बाद यह बढ़ने लगेगा और पहले बुध ग्रह अपने अंदर समा लेगा, फिर शुक्र को और फिर हमारी पृथ्वी को भी।

पर यह घटना होने में अभी कई अरब साल बाक़ी है। साथ ही ब्रह्मांड में हमे कई ऐसे ग्रह मिले है जिस पर जीवन बनाया जा सके, यह ग्रह पृथ्वी से बहोत दूर है, लेकिन उन पर पानी और ऑक्सिजन का अस्त्तिव है।

तो हो सकता है कि हम इंसान उस समय किसी और ग्रह पर अपना जीवन बना सके। फिलहाल तो मंगल ग्रह पर जीवन की तैयारी हो रही है।

चलिये अब जानते है पृथ्वी के बारे में कुछ अद्भुत तथ्य।

Facts about planet earth in hindi

प्राचीन समय में खगोल शास्त्रीओ को लगता था कि पृथ्वी ही ब्रह्मांड का केंद्र है और पुरा ब्रह्मांड उसकी परिक्रमा कर रहा है।

समुद्र के एक किलोग्राम पानी में 35 ग्राम नमक होता है।

पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल 9.8 है और यह बल 15 लाख किलोमीटर दूर तक फैला हुआ है।

पृथ्वी की परिभ्रमण गति 1,000 सालो में 17 मिली सेकंड जितनी कम हो जाती है, जिसकी वजह चाँद है।

13,00,000 पृथ्वियां सूर्य के अंदर समा सकती है।

पृथ्वी की पहली तस्वीर Apollo 17 team द्रारा ली गयी थी।

माउन्ट एवरेस्ट पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत है। इसकी ऊंचाई 8848 मीटर है।

समुद्र की सबसे गहरी खाई मारियाना गर्त है। जो 11 किलोमोटर गहरी है।

समुद्र का 65% भाग हमने अभी तक नही जाना है।

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