Zeno paradox in hindi

क्या कभी आपने अंनत शब्द के बारे में सुना है। जिसका कोई अंत नही होता उसे हम अंनत कहते है। इसी विचार के उपर आधारित है जेनो पैराडॉक्स (zeno paradox in hindi).

तो चलिए जानते है इस पैराडॉक्स के बारे में।

Zeno paradox in hindi

जेनो ग्रीक वासी थे। एक बार वो अपने घर पर बैठे थे। कुछ काम नही था। तो उन्होंने सोचा की क्यों न पार्क जाया जाए।

वो पार्क जाने के लिए निकले तभी उनके मन में विचार आया की क्या ना में पार्क तक की दूरी को आधा आधा बाँट दू और फिर पहले हिस्से जितना चलु।

फिर जो आधी दुरी बच जाएगी उसका आधा करूँगा और उतना ही चलू। इसी तरह बची हुई दुरी को आधा आधा करता जाऊ।

जैसे की,

अगर जेनो के घर से लेकर पार्क तक की दुरी 16 km है तो पहले इस दुरी का आधा हिस्सा करने पर 8 km ही चलना होगा और आगे का 8 km बच जाएगा।

फिर जब हम पहले का 8 km अंतर तय कर लेंगे तब बाकी का बचा 8 km अंतर को आधा बाँट देंगे जिससे उसके दो चार चार किलोमीटर के हिस्से हो जाएंगे।

फिर उन्ही में से पहले 4 km के अंतर की दुरी चलेंगे और बाकी बचे 4 km की दुरी को फिर से आधा करेंगे।

इसी तरह हमेशा बाकी बची दुरी के दो हिस्से होते रहेंगे और जेनो पहले भाग की ही दुरी तय करेगा।

उदाहरण के तौर पर आप यह फोटो देख सकते है।

Zeno paradox in hindi

इस तरह जेनो कभी पार्क तक पहुंच ही नही पाएगा। क्योकि हमेशा एक भाग तो बचा ही रहेगा। और वो हमेशा उस बाकि बची हिस्से की वजह से उतना पार्क से दूर रहेगा।

या फिर हम कह सकते है कि जेनो को घर से लेकर पार्क तक पहुंचने में अंनत समय लगेगा क्योकि उसने पार्क तक की दुरी को एक तरह से अंनत भागो में बाँट दिया था।

लेकिन यहाँ पर तार्किक तरह से सोचे तो जेनो चलकर पार्क जाएगा तो वो कुछ निश्चित समय में पार्क पहुँच ही जाएगा।

तो इसमें तो अंनत समय नही लगा। लेकिन गणितीय तरह से सोचे तो अंनत समय लगता है।

तो बस इसे ही कहते है जेनो पैराडॉक्स (zeno paradox).

पैराडॉक्स का अर्थ ही होता है विरोधाभास। मतलब की ऐसे दो विचार जो एकदूसरे से विरुद्ध है पर दोनों अपनी अपनी जगह सही भी है।

यहाँ हम जेनो विरोधाभास (zeno paradox in hindi) के बारे में बात कर रहे है।

जेनो ने सिर्फ यह एक पैराडॉक्स ही नही दिया था, बल्कि इस अंनत भागो वाले विचार का उपयगो करके कई पैराडॉक्स दिए थे।

दूसरा यह है।

दो स्पर्धी है जिनमे से एक लड़का है और एक कछुआ है। दोनो एकसाथ दौड़ेंगे पर शर्त यह है कि कछुआ उस लड़के से थोडा आगे से दौड़ना शुरू करेगा।

अब जैसे ही दोनो दौड़ना शुरू करेंगे जाहिर सी बात है कि लड़के की गति ज्यादा होगी लेकिन जेनो के मुताबिक फिर भी यह स्पर्धा कछुआ ही जीतेगा।

कैसे आइए जानते है।

जब लड़का उस जगह पहुंचेगा जहाँ से कछुए ने दौड़ना शुरू किया था तो उतने समय में कछुए ने कुछ अंतर काटा होगा जिससे कछुआ इस समय उस लड़के से आगे ही होगा। कछुए के इस स्थान को हम A नाम दे देते है।

अगले पल जब लड़का दौड़ना जारी रखेगा और उस A स्थान पर पहुंचेगा तब भी कछुए ने कुछ अंतर तो तय किया ही होगा।

जैसा आप इस नीचे दिए गए फोटो में देख सकते हो।

Zeno paradox kya hai

जैसे जैसे स्पर्धा आगे बढ़ती जाएगी वैसे वैसे लड़के और कछुए के बीच का अंतर कम होता जाएगा। लेकिन जब भी लड़का कछुए के पुराने स्थान पर पहुंचेगा कछुए ने कुछ तो अंतर काटा ही होगा।

इस सिद्धांत से देखे तो कछुआ ही जीतेगा जो की मैंने आपको पहले ही बताया था।

लेकिन अगर हम तर्किक तरह से सोचे तो हमे दिखेगा की लड़के की दौड़ने की गति ज्यादा है तो वो आसानी से यह स्पर्धा जित जाएगा।

यहां पर आप इन दोनों बातों को देख सकते है जो एक दूसरे से विरूद्ध है लेकिन दोनों ही अपने दृष्टिकोण से सही भी है।

आप कहेंगे ऐसे कैसे?

आप जिस तरह से भी सोचे लेकिन पैराडॉक्स इसे ही काम करते है।

जब जेनो ने अपने यह पैराडॉक्स सबके सामने रखे तब infinity का concept अपने शरुआती समय में था। जिससे जेनो के यह पैराडॉक्स से खोजकर्ताओ को infinity के विचार समझने में मदद मिली।

जेनो विरोधाभास – zeno paradox solution

जेनो पैराडॉक्स (zeno paradox) के साथ समस्या यह है कि वह सवाल उठता है कि कैसे कोई निश्चित अंतर अनंत हो सकता है।

असल में जेनो विरोधाभास में अंनत समय या अंनत अंतर नही था, बस उसने अंतर को अंनत भागो में बांटा था, जिससे वहाँ पहुंचने का समय भी अंनत भागो में बंट जा रहा था।

अगर आपको यह पैराडॉक्स जटिल लग रहा है और लगता है कि इस तरह के सवालों का कोई हल नही होता तो आप गलत हो।

अब तक कई पैराडॉक्स का जवाब हमने ढूंढ लिए है और उनमे से जेनो पैराडॉक्स (zeno paradox in hindi) भी एक है।

यह विरोधाभास जेनो के द्रारा कई सदियो पहले दिया गया था। जिसका जवाब तब नही मिला था, लेकिन आज infinity concept काफी आगे बढ चूका है।

आधुनिक युग में एक वैज्ञानिक द्रारा प्लान्क लंबाई (plank length) और प्लान्क समय (plank time) का विचार दिया गया है।

इसके मुताबिक ब्रह्मांड में छोटी सी छोटी लंबाई 1.6×10^-35 होती है। इससे छोटी लंबाई अस्तित्व ही नही रखती क्योकि यह प्रकृति की आखरी सीमा है।

अगर आप विज्ञान में रूचि रखते है तो आपको पता होगा की इलेक्ट्रान क्या होते है। इनकी लंबाई 2.43×10^−12 होती है और यह जिससे बने है उन्हें क्वार्क्स कहते है जिनकी लंबाई 0.43 x 10^-18 के आसपास होती है।

इससे आपको अंदाजा लग गया होगा की प्लान्क लंबाई कितनी सूक्ष्म होती है।

इसी तरह का कुछ समय के मामले में भी है। जैसे हम समय को आधा घँटा, 10 मिनिट 1 सेकंड या सेकंड का हजारवाँ भाग इस तरह से छोटा या बड़ा बताते है उसी तरह अगर आप इसी सेकंड के सबसे छोटे माप को देखेंगे तो वो होगा 5.39×10^-44.

मतलब की समय इससे छोटा नही हो सकता। इससे छोटा होना प्रकृति के विरूद्व है

अब फिर से आते है जेनो विरोधाभास (zeno paradox in hindi) पर।

जब जेनो दुरी को आधे आधे भाग में बांटकर आगे बढ़ता जाएगा तब यह दुरी बहोत छोटी हो जाएगी और जब यह दुरी प्लान्क लंबाई तक पहुँचेगी तब जेनो उस लंबाई को आधा नही कर पाएगा।

क्योकि यह संभव ही नहीं है। साथ ही जेनो पार्क से इस प्लांक लंबाई जितना ही दूर होगा। और अब वो आगे बढ़ेगा तो कम से कम प्लान्क लंबाई जितना तो चलेगा ही। इससे वो पार्क तक पहुँच जाएगा।

ठीक यही विचार समय पर भी लागु होता है।

इसका मतलब की जेनो पैराडॉक्स (zeno paradox) सॉल्व हो गया।

अगर आप जेनो विरोधाभास (zeno paradox) को वीडियो के जरिये समझना चाहते हो तो यह नीचे दिया है मैंने।

तो बस यह थी कुछ जानकारी जेनो पैराडॉक्स (zeno paradox in hindi) के बारे में। अगर भविष्य में टाइम मशीन बनती है तो में भुतकाल में जाकर जेनो से जरूर पूछुंगा की क्या जरूरत थी इन सबकी।

लेकिन जब तक टाइम मशीन नही बनती तब तक आप ऐसी ही और भी जानकारी का मजा उठाओ। जो मैंने यहाँ नीचे दि है।

फर्मी पैराडॉक्स के बारे में

 

बूटस्ट्रैप पैराडॉक्स के बारे में

 

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