Theory of relativity in hindi

अल्बर्ट आइन्स्टाइन द्रारा दी गयी थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी ने लगभग पुरे भौतिक विज्ञान को पलट के रख दिया था। क्योकि इस थ्योरी ने वैज्ञानिको को एक नए ब्रह्मांड को सामने लाकर रख दिया था।

सापेक्षता का सिद्धांत (theory of relativity in hindi) असल में एक नही बल्कि दो सिद्धांत है। सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत और विशेष सापेक्षता का सिद्धांत।

इनमे से पहली है थ्योरी ऑफ़ स्पेशल रिलेटिविटी।

Theory of spacial relativity in hindi – विशेष सापेक्षता का सिद्धांत

साल 1905 में आइन्स्टाइन ने थ्योरी ऑफ़ स्पेशल रिलेटिविटी (Theory of spacial relativity in hindi) सबके सामने रखी। इस के अंदर दो नियम दिए गए है उसे समझने के लिए आप पहले इस उदाहरण को देखिये।

राम और श्याम दोनों एक दूसरे से थोड़े दूर खड़े है। अब राम श्याम की तरफ 10 किलोमीटर प्रति घँटे की गति से चलना शुरू करता है।

इस बढ़ती गति को हम दो तरह से देख सकते है।

पहली यह कि श्याम को राम अपनी तरफ 10 एकम की गति से आता दिखाई देगा।

दूसरी यह की राम को श्याम अपनी और 10 एकम की गति से आता दिखाई देगा।

यह हम साफ़ देख सकते है कि राम ही श्याम की और बढ रहा है। पर असल में यह हम आसपास की चीजो की वजह से ही कह सकते है।

इसे समझने के लिए आप एक खाली अंतरिक्ष की कल्पना कीजिये, जिसमे दो यान आमने सामने है। अगर इसमें से कोई एक यान दूसरे यान की तरफ बढ़ता है तो हम यह कभी नही कह पाएंगे कि कौन सा यान आगे बढ़ रहा है।

हम जिस यान में होंगे हमे वही यान स्थिर लगेगा और सामने वाला यान गति में। इस पर से आइन्स्टाइन ने बताया कि गति हमेशा सापेक्ष होती है।

इसी पर से थ्योरी ऑफ़ स्पेशल रिलेटिविटी का पहला नियम यह है।

भौतिकी के नियम सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये समान होते है।

जैसे की,

आप अभी जमीन पर रहकर किसी पदार्थ का वजन देखिये। फिर तेज गति करती ट्रेन के अंदर उस पदार्थ का द्र्व्यमान देखिये।

आपको परिणाम समान ही मिलेंगे क्योकि भौतिकी के नियम सारी जगहो पर समान ही रहते है।

दूसरा नियम यह है।

सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये प्रकाश गति स्थिरांक है।

इस नियम के मुताबिक प्रकाश की गति हमेशा स्थिर रहती है। इसे और अच्छे से समझने के लिए चलिये वापस राम और श्याम के पास जाते है।

राम श्याम की और 10 एकम की गति से बढ़ रहा है और वो एक गेंद को राम की तरफ फेंकता है जिसकी गति 2 एकम है।

पर श्याम को यह गेंद असल में 12 एकम की गति से आती दिखेगी। क्योकि गेंद की गति में राम की गति भी जुड़ जाएगी।

अब राम के हाथ में एक बत्ती है और श्याम की और बढ़ रहा है। इस वक्त अगर राम बत्ती को चालू करेगा तो उसमें से निकलने वाले प्रकाश की गति क्या होगी।

सामान्य सी बात है आम तौर पर प्रकाश की गति 299 792 458 m / s होती है जिसे हम लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड कह ज़कते है।

अब पहले से ही राम आगे बढ रहा था और अब उसने बत्ती चालू की, तो क्या प्रकाश की गति बढ जाएगी।

नही, बिल्कुल भी ऐसा नही होगा, क्योकि Theory of spacial relativity in hindi के मुताबिक हर परिस्थिति में प्रकाश की गति स्थिर रहती है।

थ्योरी ऑफ़ स्पेशल रिलेटिविटी के दो नियम के जरिये हमे कुछ परिणाम मिलते है जिनमे से मुख्य तीन यह है।

1. प्रकाश की गति से ज्यादा गति संभव नही है।

जैसे जैसे किसी वस्तु की गति बढ़ती है वैसे वैसे उसका गतिक द्र्व्यमान भी बढ़ने लगता है। प्रकाश की गति के नजदीक पंहुचने पर द्र्व्यमान भी अनंत के आसपास पहुंच जाता है। जैसे ही उस वस्तु की गति प्रकाश की गति जितनी होगी उसका गतिक द्र्व्यमान अंनत हो जाएगा।

अंनत द्र्व्यमान को गति कराने के लिए अंनत उर्जा की जरूरत पड़ती है जो की असंभव है। इसी वजह से प्रकाश की गति से तेज गति संभव नही है।

यहाँ तक की हम किसी भी वस्तु की गति प्रकाश की गति जितनी भी नही कर सकतें।

अब जानते है विशेष सापेक्षता का सिद्धान्त का दूसरा परिणाम

2. time dilation

जब किसी भी वस्तु की गति तेज हो जाती है तब उसके लिए समय धीमा हो जाता है। इसे time dilation या समय का फैलाव कहते है।

अगर राम की गति 10 एकम है और श्याम की 20 एकम। तो ज्यादा गति की वजह से राम की तुलना में श्याम के लिए समय धीमा हो जाएगा।

पर यह तफावत बहोत ही नगण्य मात्रा में होगा, इसीलिये इसका आभास नही होगा।

लेकिन अगर कोई अंतरिक्ष यान बहोत तेज गति से पृथ्वी के बहार चारो और 5 साल तक चक्कर लगाता है और फिर वापस पृथ्वी पर आता है तब उसके लिए तो 5 साल ही बीते होंगे लेकिन हमारे लिए यह साल कई ज्यादा होंगे।

इसे ही time dilation कहते है।

अगर हम प्रकाश की तक जितना तेज यान बना पाए तो हम भविष्य में एमी यात्रा कर सकते है।

आगे बढ़ते है और जानते है theory of special relativity का तीसरा परिणाम।

3. किसी भी पदार्थ की ऊर्जा उसके द्र्व्यमान और प्रकाश की गति के वर्ग के गुणाक जितनी होती है।

यह formula आप् इस फोटो में देख ही सकते है।

Theory of relativity in hindi

इस सूत्र के मुताबिक उर्जा और द्र्व्यमान का आपस में बदलाव संभव है। या कहे की दोनों एक ही वस्तु के अलग अलग रूप है।

इस सूत्र को देखिये और सोचिये की सिर्फ 1 ग्राम द्र्व्यमान से कितनी उर्जा उत्तपन्न हो सकती है।

आज के समय में जो परमाणु बम्ब इस्तमाल हो रहे है वो इसी खोज का नतीजा है। क्योकि परमाणु बम्ब में रहा द्र्व्यमान उर्जा में बदलता है।

अब आते है थ्योरी ऑफ़ जनरल रिलेटिविटी पर।

Theory of general relativity in hindi – सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत

आइन्स्टाइन की थ्योरी ऑफ़ स्पेशल रिलेटिविटी सिर्फ अंतरिक्ष में या स्थिर गति करती वस्तु पर ही लागू होती है।

गुरुत्वकर्षण बल वाले क्षेत्र और समय के साथ बढ़ती गति (त्वरण) पर यह नियम लागू नही होते है।

इसका हल निकालने के लिए आइन्स्टाइन ने 10 साल तक महेनत की और 1915 में अपनी थ्योरी ऑफ़ जनरल रिलेटिविटी (Theory of general relativity in hindi) को पब्लिश किया।

इस थ्योरी के मुताबिक गुरुत्वाकर्षण असल में कोई बल नही बल्कि अंतरिक्ष में बना एक कर्व होता है। जैसा की आप इस फोटो में देख सकते हो।

थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी

अंतरिक्ष एक चादर की तरह है। इसमें जितने ज्यादा द्र्व्यमान वाले खगोलीय पिंड होंगे वो उतने ही ज्यादा शक्तिशाली कर्व बनाएंगे, जिससे उनका गुरुत्वाकर्षण बल ज्यादा होगा।

हमारा सूर्य भी इस तरह का कर्व बनाता है और उसी कर्व के आसपास हमारी पृथ्वी घूमती है, साथी ही दूसरे ग्रह भी।

सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत space time पर आधारित था, इसने हमे कई परिणाम दिए जिनमे से कुछ यह है।

1. गुरुत्वकर्षण बल की वजह से प्रकाश मुड़ता है, जिसे Light deflection कहते है।

इसका मतलब की जब प्रकाश किसी द्र्व्यमान वाले पदार्थ के पास से गुजरता है तब गुरुत्वकर्षण बल की वजह से वो उसकी तरफ मुड़ जाता है।

इसका सटीक उदारहण है ब्लैक होल

इसका गुरुत्वाकर्षण बल इतना ज्यादा होता है कि वो अपने नजदीक से पसार होने वाले प्रकाश को भी निगल जाता है। जिससे वो प्रकाश हम तक कभी नही पहुँच पाता। इसी वजह से ब्लैक हो को हम कभी देख नही सकते।

जब प्रकाश तारो के नजदीक से पसार होता है तब भी वो मुड़ता है, इसी वजह से हम सूर्य के पीछे आने वाले प्रकाश को भी देख सकते है।

2. गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से समय धीमा हो जाता है जिसे gravitational time dilation कहते है।

ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल वाले क्षेत्र में समय धीमा हो जाता है, इसका भी सटीक उदारहण आप देख सकते हो ब्लैक होल।

अगर आप ब्लैक होल के पास हो तो दूर खड़ा आपका मित्र आपको बहोत ही धीमा गिरता हुआ देखेगा, जब की आपके लिए सब सामान्य ही होगा।

दूसरी और ठिक इसका उल्टा अगर आप अपने मित्र को देखेंगे तो वो तेज गति में कार्य करता दिखेगा, जब की उसके लिए गति सामान्य ही होगी।

इसकी वजह है कि ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बल बहोत ही ज्यादा होता है। जिससे उसके आसपास समय धीमा हो जाता है।

Facts about theory of relativity in hindi

अल्बर्ट आइन्स्टाइन के मुताबिक space और time दोनों एक ही है जिसे वो space-time कहते थे। हिंदी भाषा में इसे काल अंतराल कहा जाता है।

आइन्स्टाइन के मुताबिक समय (time) चौथा आयाम है।

थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी (theory of relativity) ने बुध ग्रह की कक्षा में आने वाली त्रुटि को दूर किया था, जो न्यूटन के नियम नही कर पाए थे।

जब प्रकाश अंतरिक्ष में सफर करता है तब उसकी तेज गति की वजह से अंतरिक्ष (space) गति की तरफ मुड़ जाता है, जिससे समय धीमा हो जाता है।

न्यूटन के नियम के अनुसार पूरे ब्रह्मांड में समय एकसमान होता है लेकिन थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी ने यह बात गलत साबित की।

न्यूटन के नियम प्रकाश की गति पर और ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल वाले क्षेत्र पर लागू नही होते है। यह बात भी हमे सापेक्षता का सिद्धांत के जरिये पता चली।

याद रहे, आइन्स्टाइन ने न्यूटन के नियमो को गलत नही बताया था, बल्कि उसकी सीमाए तय की थी।

तो बस यह थी कुछ जानकारी थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी (theory of relativity in hindi) के बारे में। अगर अभी भी सापेक्षता का सिद्धांत से सबंधित कोई प्रश्न है तो आप कॉमेंट में पूछ सकते है।

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