About Solar system in hindi

क्या आपको लगता है कि solar system in hindi में सिर्फ 9 ग्रह और एक तारा सूरज बस इतना ही है। अगर हां, तो आपको बहोत कुछ जानना अभी बाकी है।

हम सौरमंडल को जितना आम समझते है वो इतना सामान्य नही है। 9 ग्रहो के अलावा इसमें आपको दिखाई पड़ते है धूमकेतु, क्षुद्रग्रह, asteroid belt, kuiper belt, बौने ग्रह, सूरज का भविष्य और आखिर में हमारे सौरमंडल की अंतिम सीमा।

सामान्य सौरमंडल (High quality image)

आज तक हमने सूर्यमंडल पर जितनी भी रिसर्च की है और जो जो रहस्य जाने है वो सब आज में आपको इस लेख में बताऊंगा।

ज्यादा जानकारी की वजह से लेख लंबा हो सकता है पर होगा बहोत ही रोमांचक। चलिए अब बकवास ना करते हुए सौरमंडल की यात्रा शुरू करते है।

सौर मंडल के इस लेख में आपको मिलने वाली जानकारी।

Solar system in hindi – सौर मंडल क्या है

अपने तारे के आसपास घूमते ग्रहो की पूरी रचना को star system कहा जाता है। लेटिन भाषा में सूर्य से सबंधित शब्द sol है।

इसीलिए सूर्य को solar नाम दिया गया है। और उस तारे के आसपास घूमते ग्रह की पूरी रचना को solar system कहा जाता है।

सौरमंडल कैसे बना था

आज से लगभग 4.6 अरब साल पहले अंतरिक्ष के एक विशाल बादल के छोटे छोटे टुकडे गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से एक जगह आकर जमा होने लगे।

इन टुकड़ो में जहाँ पर ज्यादा द्र्व्यमान जमा हो रहा था वहाँ हमारे सूर्य की रचना हुई। बाकी का जो भाग बच गया वो ग्रह बन गए।

कोई भी star system जब निर्माण होता है तब अपनी शुरुआत की रचना में वो एक नेब्यूला होता है। फिर वही नेब्युला अंत में जाकर एक सौरमंडल में परिवर्तित होता है।

हमारा सोलार सिस्टम जिस नेब्युला से बना था उसका नाम solar nebula है। इसी नेब्यूला में से जन्म हुआ है हमारे सौरमंडल का।

चलिये अब पहले सूर्य को जानते है और फिर ग्रहो को।

सूर्य – sun

सौरमंडल का सबसे महत्वपूर्ण भाग सूर्य ब्रह्मांड के कई अरबो तारो मे से एक है। यह हमारे solar system का केंद्र है और सारे ग्रह इसकी परिक्रमा करते है।

यह अकेला सौरमंडल का 99 प्रतिशत द्र्व्यमान रोके हुआ है। इतना द्र्व्यमान होने की वजह से इसका गुरुत्वबल प्रभावी हो जाता है जिससे सारे ग्रह इसके आसपास बंधे हुए है। अरबो किलोमीटर दूर रहा प्लूटो भी।

सूर्य की त्रिज्या 6,96,000 km है। इतने विशाल कद में 13 लाख पृथ्वी आसानी से समा सकती है।

यह हायड्रोजन और हीलियम गैस से मिलकर बना हुआ है और बाकी तारो की तरह यह भी अपनी ऊर्जा न्यूक्लियर फ्यूजन की प्रक्रिया से प्राप्त करता है। जो इसे हायड्रोजन से मिलती है।

सूर्य का रंग असल में सफेद है पर पृथ्वी के वातावरण की वजह से वो हमें पिला नजर आता है। यह अंतरिक्ष में हर सेकंड में अपना 50 लाख टन द्र्व्यमान गुमा रहा है।

सूर्य के लिए संस्कृत भाषा में 108 नाम है। जिनमे से कुछ प्रख्यात है जैसे की रवी, आदित्या, भानु।

पूरा लेख: सूर्य के बारे जानकारी और उससे जुड़े 5 तथ्य

Solar system planets – सौरमंडल के ग्रह

हमारे सौरमंडल में कुल मिलाकर 9 ग्रह (planet) है, पर यह बात असल में सच नही है। अब सिर्फ 8 ही ग्रह है।

वो कौनसा ग्रह है जिसे इसमें से निकाल दिया गया है। आपको आगे पता चल जाएगा।

बुध ग्रह – Mercury planet

बुध हमारे सौरमंडल का सबसे पहला ग्रह है। इसका व्यास 5,000 km से भी कम है। इतने छोटे होने की वजह से वो हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह कहलाता है।

यह लगभग हमारे चाँद जितने आकार का ही है। पृथ्वी से तुलना करने पर यह पृथ्वी से 26 गुना छोटा है।

सूर्य से नजदीक होने की वजह से इसकी सतह का तापमान दिन में 430 ℃ तक पहुंच जाता हैं और रात के समय -179℃ जितना ठंडा हो जाता है। तापमान के इतने तफावत की वजह से यहाँ पर जीवन संभव नही है।

बुध ग्रह का एक दिन पृथ्वी के 179 दिन का होता है। जब की उसे सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 88 दिन ही लगते है। मतलब की बुध का साल उसके दिन से भी छोटा होता है।

बुध को अंग्रेजी भाषा में mercury कहा जाता है। जो रोमन देवता के नाम पर से रखा गया है।

पूरा लेख: बुध ग्रह की सारी अद्भुत जानकारी

शुक्र ग्रह – venus planet

Solar system का दूसरा ग्रह शुक्र सबसे गर्म ग्रह है। इसकी सतह का तापमान 462℃ है। इतने ज्यादा तापमान के लिए उसका वायुमंडल जिम्मेदार है, जो सूर्य की गर्मी को बाहर नही जाने देता।

इसके वायुमंडल की वजह से वहाँ पर स्पेस मिशन करना बहोत ही मुश्किल है। साल 1966 में रूस ने इस पर venera – 3 मिशन किया था, लेकिन वो यान शुक्र की भयानक गरमी की वजह से 3 घंटे में ही नष्ट हो गया।

आसमान में यह सीरियस तारे से भी ज्यादा चमकता है। इसी वजह से रोमन सभ्यताओं ने प्यार और सुंदरता की देवी पर से इस ग्रह का नाम venus रखा है।

पृथ्वी और शुक्र दोनों ग्रह लगभग समान होने की वजह से इनको जुड़वाँ भी कहा जाता है। शुक्र का आकर पृथ्वी के 95% जितना है, जिसको हम कुछ हद तक समान भी कह सकते है।

शुक्र की खास बात यह है की वो उल्टी दिशा में घूमता है। जिस से वहाँ पर सूर्य पश्चिम से उदय होता है और पूर्व में अस्त।

पूरा लेख: शुक्र ग्रह के बारे में 17 रोचक तथ्य

पृथ्वी – earth

सूर्य मंडल का तीसरा ग्रह जो हमारी प्यारी पृथ्वी है वो सबसे खास है। क्योंकि ब्रह्मांड में एक यही ग्रह है जिस पर जीवन है। अब तक हमने जितने भी ग्रहो की खोज की है, उनमे से किसी पर भी हमे अब तक जीवन देखने को नही मिला है।

इसकी त्रिज्या 6,300 km है और यह सूर्य से 1AU कि दुरी पर स्थित है। पृथ्वी पर 70% समुद्र और 30% जमीन है। साथ ही हमारे पास एक उपग्रह भी है, जिसे हमने चाँद (moon) नाम दिया है।

पृथ्वी का 1 सौर दिन 24 घँटे का होता है और एक साल 365 दिन का होता है। 23 डिग्री जुकाव की वजह से शर्दी, गर्मी, बारिश जैसी ऋतु भी देखने को मिलती है।

यहाँ के वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन ओर 21% ऑक्सिजन है। इसी वजह से यहाँ पेड़ का अस्तित्व है, साथ ही सूर्य से बचने वाले ओज़ोन का स्तर भी बना हुआ है। पर अफ़सोस, प्रदूषण की वजह से वो अब कमजोर होता जा रहा है।

मंगल ग्रह – mars planet

हां, यह वही ग्रह है जिस पर इंसान भविष्य में जाना चाहता है। पर सिर्फ इस ग्रह पर ही क्यों।

क्योकि यह पृथ्वी की तुलना में बहोत ही समान है। यहॉ का एक दिन 24 घँटे 37 मिनिट का होता है। जब की एक साल 687 दिन का होता है। जो पृथ्वी के दो साल के बराबर है। इसकी सूर्य से दूरी 1.524 AU है।

आयरन ऑक्सिड की वजह से यह ग्रह हमे लाल रंग का दिखाई देता है। इसका व्यास पृथ्वी से आधा है और गुरुत्वाकर्षण बल तो हमारी पृथ्वी से 3 गुना कम है। पर मंगल के पास अपने दो चाँद है फोबोस और डेमोस

इस ग्रह की एक खास रचना जो इसे दुसरो से अलग करती है उसका नाम olympus mons है। यह एक विशाल ज्वालामुखी पर्वत है जो की सिर्फ मंगल ग्रह का ही नही बल्कि पुरे solar system in hindi का सबसे बड़ा पर्वत है। इसकी ऊंचाई 21 km है, जब की माउन्ट एवरेस्ट की सिर्फ 8.8 km ही है।

मंगल पर Valles Marineris नाम की एक खाई बनी हुई है। जो 400 km लंबी और 7 km गहरी है। लेकिन हम आज तक पता नही लगा पाए है कि उसमे है क्या।

पूरा लेख: मंगल ग्रह से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

गुरु ग्रह – jupiter planet

सौरमंडल का सबसे बडा ग्रह गुरु पांचवे स्थान पर आता है। इसकी सूर्य से दूरी 5.2 AU है।

इसका व्यास 1,40,000 km है। जब की पृथ्वी का व्यास सिर्फ 12,800 km ही है। पृथ्वी की तुलना में इस ग्रह का कद 1,300 गुना बड़ा है और आराम से इतनी पृथ्वी गुरु में समा सकती है।

सौर मंडल का सबसे छोटा दिन गुरु का होता है। जो सिर्फ 10 घँटे का होता है, लेकिन उसका एक साल पृथ्वी के 12 साल बराबर है। साथ ही यह एक गैसीय ग्रह है। जिससे यहाँ पर आपको जमीन देखने को नही मिलती।

यह सोलार सिस्टम का सबसे बड़ा ग्रह तो है ही, साथ में इसका उपग्रह गेनीमेड भी सौरमंडल का सबसे बड़ा चाँद है।

गुरु पर एक लाल रंग का धब्बा दिखाई पड़ता है जो हजारो सालो से चल रहा एक तूफान है। यह तूफान इतने क्षेत्र में फैला है की 3 पृथ्वी समा जाए।

गुरु को jupiter भी कहा जाता है जो रोमन संस्कृति के एक देवता का नाम है। इसी तरह गुरु को हम बृहस्पति ग्रह कहते है और वो भी हिन्दू संस्कृति के देवता का नाम ही है।

पूरा लेख: गुरु ग्रह के रहस्य और 9 रोचक तथ्य

शनि – saturn

Solar system का छठ्ठा और नँगी आँखों से देखे जाने वाला शनि आखरी ग्रह है। इसके आकार का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हो की इसका व्यास 1,20,000 km है। जो गुरु की तुलना में थोड़ा ही छोटा है।

गुरु की तरह शनि भी एक गैस जायंट प्लेनेट है। मतलब की यह पर कोई जमीन नही है। इसी वजह से इस ग्रह पर भी जीवन  संभव नही है।

इस ग्रह पर दिन तो सिर्फ 10.5 घंटे का ही होता है लेकिन इसका एक साल पृथ्वी के 29.5 साल के बराबर है।

इस ग्रह को जो दूसरों से अलग करती है वो है उसकी रिंग्स। इसके पास दूसरे ग्रहों के मुकाबले ज्यादा रिंग्स हैं। इसी वजह से उसे सौर मंडल का सबसे सुंदर ग्रह भी कहा जाता है।

सबसे ज्यादा चाँद शनि ग्रह के पास है। 82 चाँद के साथ वो चाँद का राजा कहलाता है। इन सब में से टाइटन सबसे बड़ा चाँद है। शनि ग्रह की घनता इतनी कम है कि अगर आप उसे समंदर में रखेंगे तो वो तैरने लगेगा।

पूरा लेख: शनि ग्रह की 6 अजीब बाते

अरुण – uranus

नीले रंग का यह ग्रह सौर मंडल के सांतवे स्थान पर है और सूर्य से औसतन दुरी 19.8AU है।

यह ग्रह अपनी कक्षा पर बहोत तेज होने की वजह से 17 घँटे मे ही दिन  पूरा करता है। पर सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 84 साल लग जाते है।

शुक्र के बाद यह दूसरा ग्रह है को उलटी दिशा में घूमता है। पर जहाँ शुक्र सबसे गर्म ग्रह है वहा युरेनस सबसे ठंडा है।

यह अपनी कक्षा से 97 डिग्री तक जुका हुआ है। उसी वजह से इसका एक ध्रुव 42 साल तक सूर्य के सामने रहता है ओर एक अंधकार में डूबा रहता है।

यह एक gas giant planet है पर इसकी कुछ सतह ऐमोनिया और मीथेन के बर्फ से ढंकी पड़ी है इसी वजह से इसे ice giant planet भी कहा जाता हैं।

पूरा लेख: रहस्यमय अरुण ग्रह

वरुण – Neptune

सौरमंडल के आंठवे स्थान पर स्थित यह ग्रह अंतिम है। हिंदी भाषा में इसे वरुण ग्रह के नाम से जाना जाता है। सूर्य से इसकी दुरी 30.31AU है। इतनी दुरी और धीमी गति की वजह से सूर्य का एक चक्कर पूरक करने में उसे 164 साल लग जाते है।

यह ग्रह लगभग युरेनस जैसा ही है। बस दिखने में थोड़ा ज्यादा नीला है। इसकी सतह पर भी ऐमोनिया और मीथेन की बनी हुई बर्फ ही आयी हुई है। इसी लिए इसे भी ice giant planet कहा जाता है।

इस ग्रह पर तूफानी हवा सबसे तेज होती है। जिनकी गति 2,100 km/h तक की होती है। इस पर अभी तक एक ही यान ने अभ्यास किया है।

इस पर साल 2025 में NASA नेप्च्यून पर अपना मिशन करने वाला है। जो इसके साथ इसके सबसे बड़े उपग्रह ट्राइटन का भी अभ्यास करेगा।

यम – pluto

एक ऐसा ग्रह जिसे हम solar system के 9 ग्रहो की जोड़ी समझते है लेकिन उससे ग्रह का दर्जा छीन लिया गया है।

साल 2005 में IAU ने इसे प्लूटो के पद से दरखास्त कर दिया। क्योकि इसकी कक्षा बाकी ग्रहो की तुलना में अलग थी। इसीलिए अब वो एक ग्रह ना होकर बौने ग्रह में आता है।

इसकी कक्षा गोलाकार है और एक बार तो ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि प्लूटो नेप्च्यून की तुलना में सूर्य से ज्यादा नजदीक होता है।

वैसे प्लूटो पर एक दिन 153 घँटे का होता है जो पृथ्वी के 6 दिन समान है। साल की बात करे तो उसे सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 248 साल लग जाते है।

इसका व्यास 2,376 km है, जो गुरु के सबसे बड़े चाँद से भी छोटा है। इसका आकार पृथ्वी के छठ्ठे भाग का ही है।

भले ही यह आकार में छोटा हो, लेकिन इसके पास अपने खुद के 5 उपग्रह है। और वो भी इसकी तरह मन चाहे ऐसे परिक्रमा करते रहते है।

पूरा लेख: अजीब प्लूटो ग्रह की कहानी

ब्रह्मांड के और रहस्यो को जानना है तो आप यह पढ़ सकते हो।

 

➡️ब्रह्मांड से जुड़े 10 रोचक तथ्य

 

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