information about Jupiter in hindi

हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह jupiter in hindi कोई ऐसा वैसा ग्रह नही है बल्कि ब्रह्मांड की एक अदभुत रचना है।

उसके रहस्यों को जानने से पहले आपको जानना होगा,

गुरु ग्रह का रहस्यमय इतिहास, उसका विशाल कद, शक्तिशाली वातावरण, उसके चादँ के राज और आखिर में उससे जुड़े 7 अदभुत तथ्य।

Jupiter planet in hindi, Jupiter meaning in hindi

गुरु ग्रह का इतिहास – history of Jupiter planet

बात ऐसी है कि गुरु कोई छोटा मोटा ग्रह नही है जिसे ऐसे ही नजर अंदाज किया जा सके और तो और वो हमारी पृथ्वी से ज्यादा दूर भी नही है।

ज्यादा दूर ना होने की वजह से गुरु को हम बिना किसी टेलीस्कोप के अपनी नँगी आँखों से भी देख सकते है।

इसीलिए कई प्राचीन सभ्यताओं ने इस ग्रह को देखा था और अपने संस्कृति के अनुरूप इसे नाम दिए थे।

इसी वजह इस ग्रह को किसने खोजा यह कहना लगभग असंभव है।

लेकिन वो Galileo Galilei ही था जिसने Jupiter को पहली बार टेलेस्कोप के जरिये देखा था।

नाम और हिंदी अर्थ – meaning of Jupiter in hindi

रोमन संस्कृति के भगवान पर से इस ग्रह का नाम रखा गया है। गुरु का हिंदी अर्थ बड़ा होता है।

हिन्दू संस्कृति में गुरु को बृहस्पति ग्रह से जाना जाता है। जो की एक भगवान का नाम भी है।

कैसे बना यह ग्रह – Jupiter formation

लगभग 4.5 अरब साल पहले Jupiter planet के बनने की शुरुआत (information about Jupiter in hindi) हुई थी। यह वो समय था, जब हमारा सौरमंडल अस्तित्व में आ रहा था।

गुरुत्व बल की वजह से गैस और धूल एक जगह जमा होने लगे। इन पदार्थों में गैस की मात्रा ज्यादा होने की वजह से यह एक गैस जायंट प्लेनेट बना।

इसी वजह से गुरु पर कोई जमीन नही है। अगर हम वहाँ लैंड करना चाहे तो हम उसके केंद्र में घुसते चले जाएंगे।

ऐसा नही है कि गुरु पर जमीन नही है। है, पर बहोत ही कम मात्रा में। ज्यादातर विस्तार गैस और लिकविड से बना हुआ है।

इनमे 90% हायड्रोजन और 10% हीलियम है।

गुरु की खगोलीय जानकारी – about Jupiter

अब बात आती है गुरु (Jupiter in hindi)  के आकार, कद, द्र्व्यमान और अंतर की।

गुरु के विशाल आकार की वजह से वो सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसकी त्रिज्या 70,000 km है। यानि की अगर आप गुरु के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक जाना चाहते हो तो आपको 1,40,000 जितना km अंतर काटना पड़ेगा।

कद में भी गुरु सबसे आगे है। हम अपनी इस पृथ्वी को इतना विशाल मानते है लेकिन ऐसी 1300 पृथ्वी जब मिलती है तब जाके एक गुरु ग्रह का कद बनता है।

दूसरे शब्दों में कहु तो 1300 पृथ्वी गुरु के अंदर समा सकती है।

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इतना बडा कद होने के बावजूद भी Jupiter  के पास द्र्व्यमान की बहोत कमी है। पृथ्वी से यह तकरीबन 318 गुना ही ज्यादा भारी है।

आप को लग रहा होगा ये तो बहोत ज्यादा है लेकिन असल में जितना उसका कद है उसके मुकाबले इसका द्र्व्यमान कुछ भी नही है। उसकी वजह गैस की ज्यादा मात्रा है।

भले ही द्र्व्यमान कम हो, लेकिन गुरु उन ग्रहो में आता है जिसे हम अपनी नँगी आँखों से देख सकते है। क्योंकि यह सूर्य से ज्यादा दुरी पर नही है, इससे हम रात को आसानी से उसे देख सकते है।

सूर्य से गुरु की औसतन दुरी 5.2 AU है। इतनी दुरी होने की वजह से सूर्य की किरणो को गुरु (information about Jupiter in hindi) की सतह तक पहुँचने में 44 मिनिट लग जाते है।

Note: सूर्य और पृथ्वी के बीच के अंतर को 1AU कहा जाता है।

परिभ्रमण और कक्षा

अगर किसी ग्रह पर सबसे छोटा दिन होता है तो वो गुरु है। सिर्फ 10 घँटे का ही दिन।

पर गुरु जितना अपनी धरि पर तेज है उतना ही अपनी कक्षा पर धीमा। इसे सूर्य का एक राउंड पूरा करने में 12 साल लग जाते है।

साथ ही यह अपनी धरि पर सिर्फ 3.3 डिग्री ही जुका हुआ है। इसी वजह से यहाँ मौसम में ज्यादा परिवर्तन  देखने को नही मिलता।

गुरु ग्रह का वायुमंडल – atmosphere

सौरमंडल का सबसे बड़ा वायुमंडल jupiter planet के पास है। जो लगभग 5,000 km जितनी ऊंचाई तक फैला हुआ है।

वातावरण के ऊपर के भाग में ऐमोनिया से बने बादल आये हुए है। इन बादलो में चलती हवा की गति 360 km/h जितनी होती है।

गुरु के चाँद – Jupiter moons

बात साल 1609 की है। Galileo Galilei अपने टेलेस्कोप के साथ अंतरिक्ष का अभ्यास कर रहा था। तभी उसे गुरु ग्रह के आसपास कुछ खगोलीय चीजे दिखाई दी।

पहली बार तो उसे लगा की ये तारे है लेकिन जब उनकी गतिविधियों को जांचा गया तो एक बात साफ़ हो गयी की ये जो भी चिज थी, वो तारे तो बिलकुल नहीं थी।

आखिर में Galileo ने पता लगा ही लिया की यह खगोलीय चीजे और कुछ नही बल्कि गुरु के 4 सबसे बड़े चाँद है जो उसके आसपास घूम रहे थे।

इसीलिए उन 4 उपग्रहों की खोज का श्रेय जाता है गेलेलीयो को। उन चारो उपग्रह के नाम Io, Europa, Ganymede, और Callisto है।

पर आज के समय मे उसके 79 चाँद की खोज हो चुकी है। इनमे से ज्यादातर चाँद 10 km जितने ही बड़े है। इसी वजह से इनकी खोज साल 1975 में हुई। इतने ज्यादा चाँद होने की वजह से उसे king of moons कहा जाता था।

पर अफ़सोस कुछ समय पहले ही शनि के कुछ नए चाँद खोजे गये और अब उसके पास कुल मिलाकर 82 चाँद है। जिसकी वजह से अब शनि बन चूका है king of moons.

भले ही बृहस्पति ग्रह के पास सबसे ज्यादा चाँद ना हो लेकिन उसके पास एक ऐसा चाँद है जिसके सामने कोई नही टिक सकता।

हां, में बात कर रहा हु Ganymede की। यह सिर्फ Jupiter का ही नही बल्कि पूरे सौरमंडल का सबसे बड़ा चाँद है।

यहाँ तक की वो हमारे पडोशी ग्रह बुध से भी बड़ा है। इसीलिए किसी और चाँद की जानकारी हो ना हो, पर इस चाँद की जानकारी होना बेहत जरूरी है।

Ganymede – गुरु का सबसे बड़ा चाँद

Ganymede का व्यास 5,268 किलोमीटर है। इसी वजह से वो हमारे सौरमंडल का 9वा सबसे बड़ा खोगोलिय पिंड भी माना जाता है।

इसका यह नाम ग्रीक संस्कृति के भगवान पर से रखा गया है। यह चाँद ज्यादातर पथ्थर और बर्फ से बना हुआ है। साथ ही इसके पास अपना एक पतला सा वायुमंडल भी है।

जिनमे oxygen और ozone के साथ और भी वायु देखने को मिले है। इससे हमें इस उपग्रह पर जीवन की संभावना दिखाई पड़ती है।

गुरु ग्रह की रिंग्स – rings of Jupiter

सौरमंडल में सिर्फ शनी के पास ही नही बल्कि हमारे गुरु ग्रह (Jupiter planet) के पास भी रिंग्स है। उसकी रिंग्स को तीन भागों में बांटा गया है।

अंदर की रिंग, मुख्य चमकीली रिंग्स, बहार की पतली रिंग्स।

यह सारी रिंग्स पथ्थर और धूल से मिलकर बनी हुई है जब की शनि की ज्यादातर रिंग्स बर्फ के टुकड़ो से मिलकर बनी है।

जीवन और मिशन

जमीन ना होने और तेज उठते तूफानों की वजह से गुरु ग्रह पर जीवन असंभव है। पर उसके चाँद पर अभी भी कुछ संभावनाए दिख रही है।

साल 2011 में juno यान को गुरु पर भेजा गया था और वो अभी भी कार्यशील स्थिति में है। अब साल 2026 में अगला मिशन किया जाएगा।

ब्रह्मांड की सफर पर निकले दो यान voyager 1 और voyager 2 ने भी Jupiter का अभ्यास किया था।

Facts about jupiter in hindi

अगर सौरमंडल के सारे ग्रहो को मिला दिया जाए तो भी गुरु का द्र्व्यमान 2.5 गुना ज्यादा होगा।

Ganymede अकेला ऐसा चाँद है जिसके पास चुम्बकीय क्षेत्र है।

जब Jupiter planet बना था तब वो आज की तुलना में दुगना बड़ा था। पर हर साल वो 2 cm जितना सिकुड़ता जा रहा है।

अगर गुरु ग्रह के पास 75 गुना ज्यादा द्रव्यमान होता तो वो एक तारा बन जाता।

गुरु पर घुमकेतु बहोत ही ज्यादा मात्रा में गिरते है। धरती की तुलना में लगभग 200 गुना ज्यादा।

special fact: गुरु ग्रह पर एक लाल रंग का धब्बा बना हुआ है। जिसे great red spot कहा जाता है।

असल में यह कोई धब्बा नही बल्कि एक तूफान है जो हमारी पृथ्वी से भी विशाल है। और यह तूफान हजारो सालो से चलता आ रहा है।

तो गुरु ग्रह की यह जानकारी ( information about Jupiter in hindi) आपको कैसी लगी। अगर आपको ऐसा ही कुछ रोमांचक पढ़ना है तो आप ये देख सकते हो।

 

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