quantum physics in hindi

Quantum physics एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर कई लॉगो के पसीने छूटने लगते है। क्योंकि उनका मानना है कि यह विषय हमारी समझ से परे है, इस थियरी को सिर्फ वैज्ञानिक ही समझ सकते है, लेकिन असल में ऐसा नही है।

क्वांटम फिजिक्स कोई मुश्केल विषय नही है, बस थोडा अजीब है। बस आपको जरूरत है एक अच्छे समझाने वाले की। अगर आपने एक बार जान लिया की क्वांटम फिजिक्स क्या है (quantum physics in hindi) तो आप उसके दीवाने हो जाओगे। तो फिर चलिए आज में आपको बताता हूं क्वांटम फिजिक्स की अद्भुत दुनिया के बारे में।

Quantum physics in hindi
समय से परे की दुनिया

सब कुछ जानने से पहले आपको यह जानने की जरूरत है कि असल मे क्वांटम फिजिक्स क्या है।

क्वांटम फिजिक्स क्या है | what is quantum physics in hindi

आपने अणु, परमाणु, इलेक्ट्रान, प्रोटोन जैसे शब्द तो सुने ही होंगे। यह सारी चीजें बहुत छोटी होती है यहाँ तक की बहोत ही ज्यादा सूक्ष्म। लेकिन आपको पहले यह जानने की जरूरत है कि कोन सी चिज कितनी छोटी है।

देखिये, हर वस्तु किसी छोटी चीज से बनी होती है। हमारा शरीर, पेड़ सब कुछ। तो 20वि सदी तक यह माना जाता था कि ब्रह्मांड की सबसे छोटी चीज परमाणु है और इसी से सब बना हुआ है।

उस समय न्यूटन के नियम की डिमांड थी, लेकिन आइन्स्टाइन ने बताया कि न्यूटन के नियम हर जगह काम नही करते और इसी लिए उन्होंने रिलेटिविटी की थियरी दी।

जब आइन्स्टाइन ने रिलेटिविटी का सिद्धांत सबके सामने रखा तब वैज्ञानिको को लगा की अब हमने भौतिक विज्ञान को पूरी तरह से समझ लिया है और ज्यादा जानने को कुछ बचा नही है।

लेकिन तभी साल 1900 में मैक्स प्लान्क नाम के वैज्ञानिक ने ब्लेक बॉडी रेडियेशन का प्रयोग किया। इस प्रयोग में प्लान्क को एक अजीब चिज दिखी।

साल 1900 से पहले लोगो को यही लगता था की प्रकाश सिर्फ तरंगों का बना होता है। लेकिन प्लान्क ने देखा की प्रकाश उसके प्रयोग में एक कण (particle) की तरह बर्ताव कर रहा था।

तो उसी प्रयोग पर से उसने अनुमान निकाला की प्रकाश पूरी तरह से ऊर्जा का बना होकर छोटे छोटे ऊर्जा के भाग से बना हुआ होता है। जिसे उसने क्वांटा नाम दिया।

बस यही से शुरू हुआ quantum physics. इसके बाद कई वैज्ञानिको ने क्वांटम फिजिक्स में भाग लिया और कई खोजे की।

इन खोजो में प्रोटोन ओर इलेक्ट्रान भी थे। ये कण परमाणु के अंदर पाए गए। जिससे यह साबित हो गया कि सबसे छोटी चीज परमाणु नही बल्कि यह कण है।

तब फिर से वैज्ञानिको को लगा की हम इन दो सूक्ष्म कणो को समझ लेंगे तो भौतिक विज्ञान खत्म हो जाएगा। पर समय के चलते ऐसे कई सूक्ष्म कणो की खोज हुई जैसे न्यूट्रॉन, पॉज़िट्रान, फोटोन वगेरे।

अब जब की इस तरह के कई क्वांटम कणो की खोज हुई तो उन पर रिसर्च होने लगी। रिसर्च करने पर पता लगा की यह सूक्ष्म कण अजीब तरह से बर्ताव करते है। जैसा हमारी आम दुनीया में होता है वहा ऐसा कुछ भी नही होता।

इतने छोटे स्तर पर भौतिक विज्ञान के सामान्य नियम काम नही करते थे। इन कणो को जरूरत थी नए सिद्धांतो की। इसीलिए इसका इक अलग मॉडल बनाया गया जिसे standard model नाम दिया गया।

तो बस परमाणु के बाद के इन्ही सूक्ष्म कणो की दुनिया को क्वांटम फिजिक्स quantum physics कहा जाता है। इनका अभ्यास किया जाता है और नए नए सिद्धांत दिए जाते है। चलिए, अब में आपको क्वांटम फिजिक्स की दुनिया (quantum world in hindi) के 5 अजीब राज बताता हूं।

1. Double slit experiment

क्वांटम फिजिक्स की शुरुआत

2. Schrodinger cat experiment

रहस्यमय बिल्ली

3. heisenberg uncertainty principle

स्थान और गति का बदलाव

4. quantum entanglement

भविष्य की संभावना

5.Choice delay experiment

भुतकाल में समय यात्रा

1. Double slit experiment

चलिए सबसे पहले में आपको किये गए double slit experiment प्रयोग के बारे में बताता हूं। क्योकि जब तक आप इस प्रयोग को नही जानेंगे तब तक आपके लिए क्वांटम फिजिक्स क्या है वो समझना नामुमकिन है।

तो बात ऐसी है कि साल 1805 में एक वैज्ञानिक ने यह प्रयोग किया था। प्रयोग कुछ ऐसा था कि पहले एक गन रखी जिसके अंदर से प्रकाश निकलता हो फिर बिच में एक प्लेट रखी। इस प्लेट के अंदर दो तिराडे (slit) थी।  और ठीक उसके सामने दूसरी तरफ एक बोर्ड को रखा गया था, जिस पर प्रकाश पहुँचने वाला था। आप उसकी फोटो नीचे देख सकते हो।

Double slit experiment in hindi

तो हुआ कुछ यही की प्रकाश को गन में से निकाला गया। वो प्रकाश उन तिराड में से निकलर सामने रखे बोर्ड पर जा गिरा।  लेकिन इस बोर्ड पर प्रकाश तिराड जितनी जगह में ना रहकर उसके आसपास के विस्तार में भी फैल गया। तो इससे साबित हो गया कि प्रकाश का स्वभाव तरंग (Wave) जैसा है।

मुझे पता है आपको समझ में नही आया, चलिए जानते है असल में क्या हुआ था। देखिए तरंगे पानी की लहर जैसे होती है। तरंगे या तो पूरी होती है या फिर होती ही नही।

आप अभी अपने मन में पानी की लहरो को सोचिये। क्या आप उन में से किसी लहेर को कह सकते है कि यह आधी लहेर है। नही, ऐसा होना संभव नही है। बस कुछ ऐसा ही तरंगों के लिए होता है।

तो जब प्रकाश को तिराड में से निकाला गया तो प्रकाश के अंदर की तरंगे विस्तृत हो गयी। इसी वजह से बोर्ड पर प्रकाश कई जगहों पर दिखा। अगर प्रकाश कण (particle) होता तो प्रकाश सिर्फ तिराड जितनी जगह पर ही दीखता। आप इस नीचे दिखाए गए फोटो से समझ सकते हो।

Quantum physics in hindi

बस यही से तय हुआ की प्रकाश तरंग है। double slit experiment -1 खत्म

मैंने आपको उपर बताया कि साल 1900 में मैक्स प्लान्क ने कहा था कि प्रकाश ऊर्जा का ना बना हुआ होकर ऊर्जा के छोटे छोटे बंडलों से बना हुआ होता है। और उसका प्रयोग भी यह दिखाता था की light ने कण की तरह व्यवहार किया।

इसी वजह से double slit experiment को दुबारा किया गया। लेकिन तब भी परिणाम भी वही मिले जो पहले मिले थे। मतलब की प्रकाश तरंग की तरह ही दिखा।

लेकिन फिर एक बार इस प्रयोग को किया गया और आखिर ऐसा क्यों होता है वो जानने के लिए प्लेट के पहले एक सेंसर को रखा। जो निकलने वाले प्रकाश को देखने वाला था।

पर जब यह प्रयोग किया गया तो वैज्ञानिक दंग रह गए। इस बार बोर्ड पर प्रकाश तरंग की तरह नही बल्कि कण की तरह दिखा। प्रकाश आसपास ना फैलकर सिर्फ तिराड जितने विस्तार में ही रहा।

वैज्ञनिक इस प्रयोग से कुछ और उम्मीद कर रहे थे और इनको मिला कुछ और ही। यह कोई आम बात नही थी। क्योंकि इस बार कई रहस्य सामने आने वाले थे। वजह थी प्रकाश का कण की तरह व्यवहार करना।

लेकिन सवाल उठता है क्यों। क्यों पहले प्रकाश तरंग की तरह दिखा और बाद में एक कण की तरह। एक ही चीज दो स्वभाव (dual nature) की कैसे हो सकती है।

इसकी वजह थी वो सेंसर, जो हमने प्रकाश को देखने के लिए रखा गया था। जब हम प्रकाश के उन क्वांटम कणो को नही देख रहे थे तब वो तरंग थे लेकिन जब हम उनको देखने जाते हैं तब वो कण बन जाते है।

बस यही से तय हुआ की प्रकाश के दो स्वभाव है। तरंग और कण। double slit experiment -2 खत्म।

हमारी दुनिया में दो विरोधी चीजे सही नही हो सकती। दो और दो चार हो सकते है या दो और तीन चार हो सकते है, लेकिन दोनो एक साथ सही नही हो सकते।

लेकिन क्वांटम फिजिक्स की दुनिया में ऐसा नही है वहाँ कुछ भी संभव है। क्वांटम फिजिक्स के इलेक्ट्रॉन और फोटोन जैसे कण एक साथ तरंग भी होते है और कण भी। मतलब की ऊर्जा में और सॉलिड रूप में एक साथ। visible भी है और invisible भी।

यह कुछ ऐसा है कि आपके हाथ में एक फल है, जो सेब भी है और केला भी। वो भी एक ही समय पर एक ही जगह पर और एक ही चिज के अंदर। है ना गजब का यह quantum physics।

Note: इलेक्ट्रान और प्रोटोन को कण ( particle) कहा जाता है। और कण एक स्वभाव भी है। अनाज के दाने कण का स्वभाव है जब की हमारी टॉर्च की रौशनी तरंग का स्वभाव है। तो आप कण शब्द को लेकर कन्फ्यूज मत होना।

अगर अभी भी इससे आपका मन नही भरा है तो चलिए में आपको इसका एक और रहस्य बताता हूं।

देखिए प्रकाश जिससे बना है वो कण है फोटोन। जो की इलेक्ट्रान जैसे ही होते है। अब देखिये उन तिराड में से इस कण को एक एक करके निकाला जाए तो। क्योकि अब तो यह कण (इन कणो को आप अनाज के दाने समझ सकते हो) एक एक करके निकलेंगे तो तरंग की तरह ना रहकर कण जैसा ही बर्ताव करेंगे। याद रहे इस प्रयोग में हम कोई सेंसर नही लगाने वाले।

तो यह प्रयोग किया गया और फिर से वैज्ञानिक दंग रह गए। बोर्ड पर प्रकाश तरंगे की तरह ही दिखे।

पर यह होना नामुमकिन है। जब सिर्फ एक पार्टिकल को प्लेट की तिराड में से निकालते है तो वो तरंग की तरह कैसे बर्ताव कर सकता है।

ऐसा तभी हो सकता है जब वो कण एक से ज्यादा हो। मतलब की एक ही कण एक साथ कई जगहों पर मौजूद हो। लेकिन एक ही particle एक से ज्यादा जगहों पर कैसे हो सकता है।

यह हमारी दुनिया में संभव ना हो लेकिन क्वांटम फिजिक्स (quantum physics in hindi) की दुनिया में है।

यह कुछ इस तरह से समझा जा सकता है कि आप अभी अपने घर पर भी मौजूद हो और अपने स्कुल में भी। आप एक साथ दो जगहों पर हो। double slit experiment -3 खत्म।

आपको तो अब पता चल ही गया होगा की क्वांटम फिजिक्स असल में कितना रहस्यमय है। लेकिन इसका सबसे बड़ा रहस्य तो अभी बाकी है। जो में आपको इस लेख के अंत में बताऊंगा, लेकिन पहले आप इस रहस्यमय बिल्ली को जानिए।

2. Schrodinger cat experiment in hindi

मैक्स प्लान्क के बाद कई वैज्ञानिको ने क्वांटम फिजिक्स में अपना हाथ आजमाया। यहा तक की आइन्स्टाइन ने भी इसमें हिस्सा लिया था। उसी में से एक वैज्ञानिक ने अपनी तरफ से एक थियरी दी।

उस थियरी के मुताबिक क्वांटम पार्टिकल अजीब तरह से व्यवहार करते है। जब इन क्वांटम कणो (quantum particles) को कोई नही देख रहा होता है तब वो सारी संभावनाओ में एक साथ होते है। लेकिन जब हम उन्हें देखने जाते है तो वो सारे क्वांटम कण मिलकर कोई एक संभावना को हमारे सामने दिखाते है।

यह थियरी कितनी सच है वो देखने के लिए श्रोडिंजेर नाम के एक वैज्ञानिक ने एक प्रयोग किया। उस प्रयोग को Schrödinger cat experiment नाम दिया।

इस प्रयोग में उसने एक बिल्ली को एक बॉक्स के अंदर बंद किया और बॉक्स में एक जहरीली बोतल रखी। साथ ही एक रेडिएशन निकलने वाले पदार्थ को हथौड़े से जोड़ा।

यह सब कुछ इस तरह से सेट किया गया था कि जब पदार्थ में से रेडिएशन निकलेगा तो हथौड़ा अपने आप बॉटल से टकरायेगा और जहरीली गैस बॉक्स में फ़ैल जाएगी, जिससे बिल्ली मर जाएगी।

लेकिन यहाँ पर ट्विस्ट ये है कि उस पदार्थ में से रेडिएशन निकलने की संभावना 50% ही थीं। मतलब की बिल्ली के मरने की संभावना भी 50% ही रहेगी।

schrodinger cat in hindi

बिल्ली भी आखिर क्वांटम पार्टिकल से मिलकर ही बनी हुई होती है। तो यहाँ पर बिल्ली की दो संभावनाए है। तो बिल्ली के अंदर रहे क्वांटम कण भी एक साथ दो संभावना में होंगे।

इसका मतलब कि बिल्ली एक ही समय पर एक साथ ज़िंदा और मृत दोनों है। क्योकि थियरी के मुताबिक क्वांटम पार्टिकल एक साथ सारी संभावना में होते है। लेकिन जब हम उन्हें देखने जाते है तब वो सारे क्वांटम पार्टिकल मिलकर कोई एक संभावना को हमारे सामने रखते है।

उसी तरह जब तक बॉक्स बंध है तब तक बिल्ली मरी हुई और जिंदा दोनों है, लेकिन जब हम बॉक्स खोलेंगे तो सारी संभावना मिलकर कोई एक हमे दिखाएंगे। मतलब की या तो बिल्ली जिंदा होगी या मरी हुई।

तो बस यह प्रयोग किया गया था क्वांटम फिजिक्स को समझने के लिए। क्या आपको जानने का मन कर रहा है कि असल में उस बिल्ली का क्या हुआ।

असल में यह प्रयोग पूरी तरह से दिमाग में किया गया था, बस यह जानने के लिए की वो थियरी कितनी सच है। लेकिन थियरी का कुछ मतलब नही निकला यह प्रयोग जिसने किया था उसे quantum physics भेजामारी वाला लगा और वो दूसरी खोज में चल पड़ा।

यह प्रयोग जिस थियरी के लिए किया गया था, उस थियरी को लगभग सब लोग आज नकार रहे है। क्योंकि बिल्ली के मरने की संभावना उस हथौड़े, बॉटल, और पदार्थ सब पर थी। क्योंकि ऐसा हो सकता है कि उनमे से कुछ चीजे ठीक से काम ना करे। जिससे हम यह कह सकते है कि सिर्फ देखने वाले पर ही बिल्ली का आधार नही रहता। और दूसरी बात ये की बिल्ली खुद यह सब देख रही थी तो क्वांटम कणो को देखने वाला कोई था।

वैसे जब तक किसी भी थियरी को साबित नही किया जाता तब तक उसे नही माना जाता। लेकिन इस थियरी के साथ यह भी बात मानी जाती है कि जब हम बॉक्स खोलते है तो बिल्ली एक ब्रह्मांड में ज़िंदा होगी और दूसरे में मरी हुई।

मतलब की अगर हमारे ब्रह्मांड में बिल्ली ज़िंदा निकलेगी तो दूसरे ब्रह्मांड में मृत। अगर यह बात सच है तो यह बहुत गजब का होगा, क्योकि इससे कई रहस्य सामने आएंगे। खास करके समांतर ब्रह्मांड का।

3. heisenberg uncertainty principle

आपको एक कार में अंजान जगह रख दिया जाए और आपको पता ना हो की आप कहाँ है और आप की कार कितनी गति से चल रही है।

तो आप पहले क्या जानना चाहेंगे। जगह या कार की गति। कुछ लोग कहेंगे कि में दोनों ही जानना चाहता हूँ। लेकिन वो संभव ना हो तो।

ऐसा क्यों इसका जवाब भी क्वांटम फिजिक्स ही है। हमारी आम सी दुनिया में तो हम कहाँ है और हमारी गति क्या है, वो दोनों एक साथ जान सकते हैं। लेकिन क्वांटम दुनिया (quantum world) में ऐसा नही हो सकता।

Quantam physics  की दुनिया के क्वांटम कण में ऐसी शक्तिया होती है की जब हम इन कणो की गति नापने जाते है तो उसकी जगह बदल जाती है और जब जगह नापने जाते है तब गति।

मानो यह क्वांटम दुनिया हमारे साथ खेल रही हो। जैसे हमारे साथ मजाक कर रही हो।

4. Quantum entanglement

कोई अचानक आप के पास आकर कहे की आप मुझ से जुड़े हुए है। तो आपको लगेगा की क्या बकवास कर रहा है।

आप यह स्टोरी देखिए। दो दोस्त है। रोहन और सोहन। यह दोनों पहले हाथ मिलाते है और फिर अपने अपने रास्ते चले जाते है। अब दोनों एकदूसरे से बहोत दूर है। बहोत मतलब बहोत।

तो अब में रोहन को गोल गोल घुमाता हु। इसी वजह से सोहन भी गोल गोल घूमने लगता है। तो क्या ऐसा पॉसिबल है की रोहन की असर सोहन पर हो।

हमारे आम से जीवन में भले ऐसा ना होता हो पर क्वांटम फिजिक्स ऐसा करने में माहिर है।

जब क्वांटम दुनिया के कोई दो कण (electron, photon) एक दूसरे के संपर्क में आते है तो वो एक दूसरे से जुड़ जाते है। अब अगर इन दोनों कण को एक दुसरे से अलग करते है तब भी वो एक दूसरे से जुड़े हुए ही रहते है।

तो जब हम उनमे से किसी एक कण पर कोई बदलाव करते है तो वो बदलाव दूसरे कण पर भी होगा। भले ही दोनों कणो के बीच की दुरी हजारो किलोमीटर क्यों न हो।

क्वांटम फिजिक्स (Quantum physics in hindi) की इस घटना का उपयोग करके एक फोटोन को 213 किलोमीटर दूर टेलीपोर्ट किया था। सीधा कहु तो आपने मूवी में टेलीपोर्टेशन देखा होगा। हां, तो ऐसा करना संभव है। भले आज के समय में ना हो। पर भविष्य में हो सकता है।

5. Delay choice experiment

मैंने आपको कहा था की लेख के अंत में में आपको एक जादुई चिज के बारे में बताऊंगा। तो वो समय आ चुका हैं।

आपको double slit experiment तो याद ही होगा। जिससे क्वांटम फिजिक्स का जन्म हुआ था। हां, तो बात ये है कि हम सेंसर को प्लेट के पहले लगाते थे। तो उसी सेंसर की वजह से प्रकाश एक कण की तरह प्लेट की तिराड में से निकलता था। क्योंकि उस light को मालूम था कि कोई उसे देख रहा है।

लेकिन क्या हो अगर हम सेंसर को उस प्लेट के बाद रखे। इससे होगा ये की प्रकाश उन तिराड (slit) से तरंग के रूप में निकलेगा। क्योकि उसे देखने वाला तो तब होगा नही, ओर जब तिराड में से निकलेगा तो सेंसर उसे देख लेगा। इसकी तस्वीर आप नीचे देख सकते हो।

What is quantum physics in hindi

तो ये प्रयोग किया गया और परिणाम फिर से ऐसे मिले जिसकी उम्मीद नही थीं। परिणाम ये मिला की प्रकाश ने कण(particle) की तरह बर्ताव किया

तो सवाल उठता है क्यों? क्यों आखिर light ने कण की तरह बर्ताव किया।

जब की सेंसर प्लेट के दूसरी तरफ रखा है तो उससे कोई फर्क नही पड़ेगा, क्योकि तिराड में से  कण निकलेंगे तो बोर्ड पर कण दिखेंगे और तरंग की तरह निकलेंगे तो तरंग।

तो बात ये है कि इस प्रयोग में कोई भी सेंसर प्लेट के पहले नही लगा था तो प्रकाश तिराड में से तरंग की तरह निकलेगा और तरंग की तरह ही बोर्ड पर जा गिरेगा।

पर प्रयोग में हमे परिणाम मिला की प्रकाश कण की तरह ही दिखा।

ऐसा तो तभी हो सकता है जब उन क्वांटम कणो को पता हो की प्लेट की दूसरी तरफ कोई सेंसर लगा हुआ है और उन्होंने उसी तरह बर्ताव किया जैसे उनको पहले से सब मालूम हो।

या हम कह सकते है कि उन क्वांटम कणो ने टाइम ट्रेवल किया हो। जब वो तिराड में से निकले तो उन्हें पता चल गया कि कोई सेंसर लगा है फिर वो भुतकाल में पीछे गये, उस समय में जब वो कण तिराड में से नही निकले थे।

जो की उन क्वांटम कणो को अब मालूम था कि आगे एक सेंसर लगा है तो वो तिराड में से एक कण की तरह ही निकले।

इस प्रयोग से quantum physics का रहस्य सामने आया की वो time travel कर सकते है। और अगर क्वांटम कण समय में पीछे जा सकते है तो हम भी जा सकते है। क्योकि आखिर हम भी तो उसी से बने हैं।

ज्यादा जनाकारी के लिए आप यह वीडियो देख सकते हो। और आगे जानिए अदभुत बाते क्वांटम फिजिक्स की।

Video credit: facttachz

गजब की बाते और फैक्ट्स – facts about quantum physics in hindi

क्वांटम फिजिक्स की दुनिया में कुछ भी एक्सिडेंटली नही होता। मतलब की गलती से हो गया ऐसा होना क्वांटम फिजिक्स की दुनिया (quantum physics in hindi) में संभव नही है।

क्वांटम वर्ल्ड में कुछ भी पहले से तय नही होता, कब क्या हो उसका अंदाजा भी हम नही लगा सकते। यहा तक की हम संभावना भी नही बता सकते की इस घटना के बाद ये घटना हो सकती है। कभी कभी तो लगता है कि खुद क्वांटम फिजिक्स को ही मालूम नही होगा कि वो क्या कर रहा है।

Quantum physics के मुताबिक जब हम किसी चिज को नही देख रहे होते है तो वो चिज वहाँ पर ऊर्जा (तरंग) के रूप में होती है। अगर अभी आप अपने घर से दूर है और आपके घर को कोई नही देख रहा है तो आपका घर वहाँ पर ऊर्जा के रूप में होगा लेकिन जब आप उसे देखने जाएंगे तो वो सॉलिड रूप में आ जाएगा।

कभी कभी तो लगता है मानो क्वांटम फिजिक्स के सारे रहस्य जुड़े हुए है और किसी एक चीज का संकेत दे रहे हो। जो भी हो आपको यह जनाकारी कैसी लगी वो कमेंट में बताना।

अगर आपको और भी कुछ ऐसा जानना है तो आप ये तीन विषयो को जान सकते हो।

➡️नौंवे ग्रह प्लूटो की अजीब कहानी

➡️ ब्रह्मांड के अंत की गजब जानकारी

➡️हमारे सूर्य के बारे में कुछ अलग जानकारी

1 thought on “quantum physics in hindi”

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