प्लूटो ग्रह की कहानी और तथ्य – Pluto planet in hindi

एक ऐसा ग्रह जिसे 75 साल तक एक ग्रह का दर्जा दिया गया और बाद में बेचारे को लात मार कर नौ ग्रहों की जोड़ी में से निकाल दिया गया। उस ग्रह को आज हम प्लूटो ग्रह के नाम से जानते है। यह ग्रह जितना अजीब है उससे ज्यादा तो अजीब इसका इतिहास है। तो चलिये जानते है pluto in hindi के बारे में।

प्लूटो का इतिहास – history of Pluto planet in hindi

साल 1840 में न्यूटन के नियम का इस्तेमाल करके वैज्ञानिक Urbain Verrier ने पता लगाया कि युरेनस प्लेनेट की कक्षा में कुछ गड़बड़ी चल रही है। लेकिन तब इस पर इतना ज्यादा ध्यान नही दिया। बाद में जब नेप्च्यून की खोज हुई तब उसके द्र्व्यमान में भी कुछ गड़बड़ी आ रही थी।

उस समय वैज्ञानिको को समझ नही आया की युरेनस की कक्षा और नेप्च्यून के द्र्व्यमान दोनों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है। रिसर्च करने पर पता चला की कोई बाहरी अंजान चिज का प्रभाव इन दोनो ग्रहो पर पड़ रहा है। लेकिन वैज्ञानिक इस रहस्यमय चिज के बारे में कुछ नही जानते थे, इसीलिए इसे नाम दे दिया गया planet X.

साल 1894 में Percival Lowell नाम के खगोल शास्त्री ने Lowell Observatory की स्थापना की साल 1906 से planet x को खोजना शुरू किया। वो लगभग 10 साल तक उस ग्रह को खोजते रहे लेकिन यह रहस्य सुलझा नही और फिर 1916 में उनकी मृत्यु हो गयी। लोवेल ने उस रहस्यमय चीज की दो तस्वीरे भी ली थी, लेकिन उन्हें इसके बारे में पता नही था।

प्लूटो की खोज – pluto in hindi

कुछ समय तक लोवेल की रिसर्च पर कुछ क़ानूनी झग़डे चलते रहे, लेकिन आखिर में साल 1929 में उनकी पत्नी ने यह रिसर्च चालू करवाई और उस ग्रह को खोजने की जिमेदारी दी गयी Clyde Tombaugh को। इस बंदे ने 1 साल की महेनत के बाद इस रहस्यमय प्लेनेट को खोज निकाला।

अब जब की उस प्लेनेट की खोज हो चुकी थी तो अब बारी थी उसके नाम की। रखने के लिए तो कई सारे नाम थे, लेकिन आखिर में प्लूटो नाम को ज्यादा वोट मिले और उसे पसंद किया गया। इस नाम का सुझाव देने वाली लड़की को बाद में 450 डॉलर का इनाम भी मिला। इस ग्रह का pluto नाम रखने का एक ये भी कारण था कि उसका पहला अक्षर Percival Lowell से मैच होता था। क्योंकि इन्होंने ही उस लेब की स्थापना की थी जिसके जरिये आज हम प्लूटो ग्रह को खोजने में सफल हुए थे।

प्लूटो ग्रह का हिंदी अर्थ – Pluto meaning in hindi

प्लूटो यह शब्द बस ऐसे ही नही लिया गया है। इसका भी एक अर्थ (meaning) है। यह नाम रोमन संस्कृति में god of underworld पर से लिया गया है। जिसका हिंदी में अर्थ होता है पाताललोक के भगवान।

हिन्दू संस्कृति में देखा जाए तो प्लूटो का हिंदी नाम (Pluto in hindi name) यम होता है। जो की मृत्यु के देवता है।

प्लूटो की अजीब कक्षा – orbit of pluto

अब अगर बात करे प्लूटो ग्रह के परिभ्रमण की तो pluto की अपनी धरि पर गति बहोत कम है। बहोत मतलब बहोत ही कम। प्लूटो पर एक दिन 153 घंटे का होता है। मतलब की हमारे 6 दिन और वहाँ का सिर्फ एक दिन। वैसे इसमें ज्यादा चौंकने वाली बात नही है क्योंकि उसे सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 248 साल लगते है जो की कुछ ज्यादा ही समय है। इतने समय में तो हमारी 2-3 पीढियां चली जाए। इतना ज्यादा समय लगने की वजह है इस ग्रह की धीमी गति।

वैसे तो pluto planet भी सूर्य की परिक्रमा करता है लेकिन फिर भी उसकी कक्षा को लेकर कई उलझने है। ऐसा इसीलीए क्योकि प्लूटो की कक्षा बहोत ही अजीब है बाकी सब ग्रहो की तुलना में। एक बार तो ऐसी स्थिति आती है कि प्लूटो ग्रह की कक्षा नेप्च्यून की कक्षा के ऊपर से निकलती है। लेकिन फिर भी गुरुत्वाकर्षण की वजह से दोनों ग्रह कभी नही टकराते। जब प्लूटो यहाँ से पसार होता है तब वो सूरज से नेप्च्यून की तुलना मे ज्यादा नजदीक होता है।

Pluto in hindi

शुक्र और युरेनस की तरह यह ग्रह (pluto planet in hindi) भी उल्टा घूमता है, जिसकी वजह से यहाँ सूर्य पश्चिम से निकलता है और पूर्व में डूबता है। इस ग्रह की अजीब बात यह है कि यह अपनी धरी से 120 डिग्री जुका हुआ है, इतने जुकाव की वजह से यहाँ का मौसम बहोत अजीब रहता है। साथ ही प्लूटो का एक चौथाई भाग हमेशा उजाले में रहता है और एक चौथाई भाग हमेशा अँधेरे। इसी वजह से यहाँ पर इंसानी जीवन भी नही रह सकता।

प्लूटो ग्रह के बारे में – about Pluto in hindi

यह ग्रह हमारे सौरमंडल का नौवा ग्रह है और साथ में सबसे ज्यादा दूर भी। सूर्य से प्लूटो की दुरी 39 AU है। सूर्य से पृथ्वी की दुरी को 1 AU कहा जाता है। वैसे pluto in hindi की यह दुरी सामान्य है। अगर हम इसकी कक्षा को देखेंगे तो वो पूरी तरह से गोल ना होकर थोड़ी विचित्र है। इसकी वजह से एक समय पर प्लूटो ग्रह सूर्य के सबसे नजदीक आता है और एक समय पर सूर्य से काफी दूर।

सबसे नजदीक अंतर 29.7 AU है जब की सबसे दूर का अंतर 48.9 AU है। इतने बड़े तफावत की वजह से pluto के अंतर को सरेराश 39.5 AU माना जाता है। वैसे ये भी कोई कम अंतर नही है। सूर्य की रौशनी को भी प्लूटो पर पहुचने में 5.5 घंटे लगते है।

यह ग्रह इतना बड़ा तो नहीं है लेकिन फिर भी बात करे इसके लंबाई की तो pluto planet का व्यास 2,376 kilometers जितना है। जो की हमारे चाँद से भी छोटा है। पृथ्वी से तुलना करने पर प्लूटो ग्रह पृथ्वी के छठे भाग का ही है।

 

Pluto planet in hindi
देखिए पृथ्वी और प्लूटो को

अब बात आती है इसके द्र्व्यमान की। तो प्लूटो ग्रह का द्र्व्यमान 1.3 x 10^22 kg है, जो की हमारे पृथ्वी का सिर्फ 0.22% ही है। चौकाने वाली बात तो यह है कि Pluto का मांस हमारे सौरमंडल में रहे कई चाँद से भी कम है। छायद इतने कम मांस की वजह से ही यह ग्रह हमेशा वादविवाद का कारण बना है।

प्लूटो की बनावट – pluto in hindi

प्लूटो की 98% सतह नाइट्रोजन के बर्फ से बनी है और बाकी 2% में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड है। इस तरह की सतह होना ज्यादा अजीब नही है क्योंकि हमारे सौरमंडल के कई ग्रहो की सतह इससे भी ज्यादा अजीब है, लेकिन pluto को जो चिज दुसरो से अलग करती है वो है इसका हदय। आप सोच रहे होंगे की प्लेनेट का ह्दय कहाँ से आया। बात ऐसी है कि pluto की सतह पर एक दिल का आकार बना हुआ है। ये दिल 1,000 किलोमीटर लंबा है साथ ही प्लूटो के चमकीले भाग की और है। जिससे हम इसे साफ़ साफ़ देख सकते है।

चमकीले से याद आया, प्लूटो की चमक और कलर कुछ कम नही है। क्योकि इस ग्रह की कुछ जगहे ऐसी है जहाँ पता ही नही चलता की यह उसका कलर है या अँधेरा। अगर साफ शब्दों में कहु तो कुछ काले रंग के भाग है, जिस पर कुछ वैज्ञानिक यह कहते है कि यह pluto planet का चॉकलेट जैसा रंग है जब की कुछ को लगता है कि यह अँधेरा है।

जितनी परेशानी Pluto को खोजने में हुई है उससे ज्यादा परेशानी तो उसे समझने में होती है। अभी के समय प्लूटो ग्रह के आसपास कई छोटे छोटे बर्फीले टुकड़े घूम रहे है यह बर्फ आज से 4.5 अरब साल पहले बने थे। ऐसी चीजो की वजह से यह ग्रह कैसे बना था, यह जानना एक चेलेंज बन जाता है।

प्लूटो का वातावरण – atmosphere

वातावरण किसी भी प्लेनेट का सबसे जरूरी हिस्सा होता है, क्योकि इसी से तय होता है कि वो ग्रह रहने योग्य है कि नही। प्लूटो का भी कुछ ऐसा ही हाल है, इसका वातावरण पतला सा है। लेकिन इसके वातावरण में अजीब चीज जो देखने को मिली है वो ये है कि सूर्य के नजदीक आते ही इसका वातावरण फैलने लगता है और सूरज से दूर जाने पर फिर से छोटा हो जाता है। पता नही इस ग्रह पर कितनी अजीब चीजे है।

न्यू रिसर्च से पता चला है कि इसके वातावरण के ऊपर के भाग का तापमान -203 डिग्री है। इतनी ठंड होने की वजह से इस पर स्पेस मिशन करना भी बहोत मुश्किल है क्योंकि इतनी ठण्ड में कई इलेक्ट्रिक हथियार काम करना बंद कर देते है।

प्लूटो के चाँद – moons of pluto

इतना छोटा होने के बावजूद प्लूटो के पास चाँद  है और वो भी पुरे पांच। जब की हमारे पास सिर्फ एक ही है। इसके चाँद भी pluto की तरह मन चाहे वैसे उसके आसपास घूमते रहते हैं। वैसे इसकी जानकारी में कुछ ज्यादा तो नही है लेकिन फिर भी मे आपको इसकी एक दो बाते बता ही देता हूं।

Charon: यह नाम ग्रीक की संस्कृति ferryman of the dead से लिया गया है जिसका अर्थ होता है मृतकों का पिता। प्लूटोम् का यह चाँद 1,200 किलोमीटर लंबा है। इतने बड़े होने की वजह से pluto पर इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से ऐसा लगता है मानो दो ग्रह (pluto planet in hindi) एक दूसरे की परिक्रमा करते हो।

Nix: इस चाँद की त्रिज्या सिर्फ 50 किलोमीटर है। इसका यह नाम रात की देवी (goddess of night) से रखा गया है। साथ ही इसे खोजने वाले यान New horizons को सन्मानित करने के लिए भी। क्योकि उसका भी पहला अक्षर N है। वैसे इसकी खोज 2005 हुई थी।

Styx: इस उपग्रह को देखकर लगता है कि जैसे इसकी खोज अभी ही हुई हो। साल 2012 में खोजे गये इस चाँद का नाम ग्रीक के देवता styx पर से ही रखा गया है। जिन्होंने पाताल लोक और पृथ्वी के बीच की सीमा बनाई थी। pluto के इस उपग्रह की लंबाई सिर्फ 16 किलोमीटर है।

Kerberos: 2011 में खोजे गये इस चाँद की लंबाई 19 किलोमीटर है। kerberos कई सिर वाले कुते का नाम है जो पाताललोक में एक दरवाजे की रखवाली करता था।

Hydra: इस चाँद को Nix के साथ ही 2005 में खोजा गया था। इसकी लंबाई 51 किलोमीटर है, जिसकी वजह से यह दूसरा सबसे बड़ा चाँद बनता है। अगर बात करे इसके नाम की तो पाताल लोक के नौ सिर वाले सांप को ग्रीक संस्कृति में hydra कहाँ जाता था।

क्यों प्लूटो ग्रह नही है – why pluto is not a planet in hindi

प्लूटो को लेकर अभी भी कई वादविवाद होते है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा रहस्य है उसके प्लेनेट को लेकर। साल 1930 में जब खोज हुई तब pluto को एक ग्रह का दर्जा दिया गया। लेकिन जब साल 2005 में eris की खोज हुई तब एरिस को एक बौने ग्रह (dwarf planet in hindi) का दर्जा दिया गया। अगर आपको नही पता की dwarf planet क्या होते है तो यह पृथ्वी से काफी छोटे ग्रह होते है और गुरुत्वाकर्षण बल भी बहोत कम होता है।

तो एरिस और प्लूटो दोनो काफी समान ग्रह थे। इसी वजह से प्लूटो को भी 75 साल बाद 2006 में IAU ने उसे नौंवे प्लेनेट से उठाकर dwarf planet में दाल दिया और पीछे रह गए सौर मंडल के आठ ग्रह। इसी वजह से प्लूटो ग्रह नही है।

लेकिन ये बात यहाँ तक ही सीमित नही रही, इससे काफी लोग नाराज हुए और उन्होंने कहा कि प्लूटो एक ग्रह ही है। यहाँ तक की NASA के एडमिनिस्ट्रेटर ने भी यह कहा कि में भी प्लूटो को एक ग्रह ही मानता हूं।

तब तो IAU ने बता दिया की क्यों प्लूटो एक ग्रह नही है। लेकिन अभी साल 2015 में हुई स्पेस मिशन से यह पता चला है कि प्लूटो ग्रह को हम जितना अजीब अजीब मानते थे यह उससे भी ज्यादा अजीब है और कुछ ऐसी विशेषताए भी पाई गई है जो बताती है कि यह एक ग्रह है।

लेकिन अभी के समय यह एक बौना ग्रह (dwarf planet in hindi) ही है। पर हो सकता है कि यह भविष्य में फिर से नौवा ग्रह बने।

अंतरिक्ष के मिशन

साल 2015 में new horizons नाम का स्पेस यान प्लूटो तक पहुंच गया था, जो की एक सफल अभ्यान रहा था। अभी के समय तो चर्चाए हो रही है अगले मिशन के लिए। जब अगला मिशन होगा तब में आपको उसके बारे में जरूर से जानकारी दे दूंगा, लेकिन तब तक आप प्लूटो ग्रह के कुछ अदभुत फैक्ट्स को जान लीजिए।

गजब की बाते और तथ्य – facts about Pluto in hindi

 

प्लूटो को खोजने वाले वैज्ञानिक की अस्ति को new horizons यान में रखा गया था।

साल 1979 – 1999 के बीच प्लूटो सूर्य से ज्यादा नजदीक था बजाय नेप्च्यून के।

1941 में Glenn T. Seaborg ने एक नया तत्व खोज निकाला था, जिसका नाम प्लूटो के ऊपर से plutonium रखा गया।

मिकी माउस कार्टून में एक कुत्ते का नाम प्लूटो है, जो प्लूटो ग्रह से ही लिया गया है।

प्लूटो प्लेनेट का 1/3 हिस्सा पानी से बना हुआ है।

तो बस यही थे प्लूटो ग्रह के बारे में रोचक तथ्यों और गजब की जनाकारी। अगर आपको ऐसा कुछ और मजेदार पढ़ने का मन है तो आप ये तीन आर्टिकलो को ट्राय कर सकते हो।

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