Information about Voyager 1 in hindi

चलिए में आपको एक सवाल पूछता हूं। हम अब तक ब्रह्मांड में कितनी दूर तक जा पाए है। छायद कहे की इंसान चाँद तक या मंगल ग्रह तक पहुंच चूका है।

लेकिन आपको कैसा लगेगा अगर में आपसे कहु की ये तो कुछ भी नही है। इंसान की बनाई चीज ब्रह्मांड के उस जगह पहुंच चुकी जहाँ पर आपकी यह सोच छोटी लगती है।

आपको लग रहा होगा की में ये क्या बकवास कर रहा हु, लेकिन असल में बात कर रहा हु voyger 1 in hindi के बारे में।


Voyager 1 in hindi


Introduction of Voyager 1 in hindi

यह वो अंतरिक्ष यान है जिसने मानव इतिहास रच दिया है। अब चलिए ज्यादा फालतू की बात ना करते सीधे आपको जानकरी देता हूं।

1977 के दौरान असल में NASA ने गुरु, शनि और प्लूटो के लिए दो यान और गुरु, यूरेनस और नेप्च्यून ग्रह के लिए दो और यान को लौन्च करने का प्लान किया था। लेकिन कम बजेट के चलते इन सारे मिशन को रोक दिया गया। फिर भी नासा वाले नही रुके उन्होंने ने इन सारे मिशन के बदले सिर्फ दो मिशन को लौन्च करने का सोचा। और वो दो मिशन थे Voyager 1 and voyager 2.

5 सितम्बर 1977 को voyager 1 को अमेरिका की स्पेस एजंसी NASA ने लांच किया था।

The grand tour in hindi

इस यान को साल 1977 में लौन्च करने का एक बड़ा कारण था। इस साल गुरु, शनि, युरेनस और नेप्च्यून यह सारे ग्रह एक खास स्थिति में आते थे। जिसे the grand tour कहा जाता है। यह स्थिति 176 सालो में सिर्फ एक बार ही आती है।


Voyager 1 in hindi


आप सोच रहे होंगे की ऐसी क्या खास स्थिति बनती होगी। तो इसमें होता यह है कि यह सारे ग्रह एक दूसरे के पास आते है और इस तरह की स्थिति बनाते है जिससे गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करके हम अंतरिक्ष यान को एक ग्रह की कक्षा में से दूसरे ग्रह की कक्षा में आसानी से भेज सके। अगर अभी भी समझ में नही आया तो कोई बात नही, आप इसे नीचे की फोटो में देख सकते है।

गुरु ग्रह की जानकारी Voyager 1 in hindi

साल 1977 में Voyager 1 in hindi को छोड़ा गया। इसके एक साल बाद इसने गुरु ग्रह की अपनी पहली तस्वीर हमे दी। यह तस्वीर तब ली गयी जब वॉयजर 1 गुरु ग्रह से 165 million miles दूर था।

फिर यह यान आगे बढ़ता रहा। साल 1979 में वॉयजर 1 ने एक ऐसे पतले रिंग की तस्वीर भेजी जो गुरु ग्रह के चारो और बनी हुई थी। इसके साथ इसने गुरु के दो नए चाँद Thebe and Metis भी खोज निकाले। साथ ही में Europa और Ganymede इन दोनों चाँद की जानकारी भी हमे दी।

5 मार्च 1979 को वॉयजर 1 गुरु के सबसे नजदीक था। लगभग 1,74,000 miles जितना ही दूर। और अब वक्त था शनि ग्रह पर जाने का।

शनि ग्रह की जानकारी information about Voyager 1 in hindi

साल 1980 में वॉयजर 1 शनि के नजदीक पहुंच गया और उसके एडवांस केमेरा ने उसकी एक तस्वीर भी भेजी। नासा के पहले मिशन द्रारा ही शनि ग्रह की एक रिंग को ढूंढ लिया गया था, जिसे F rings नाम दिया गया था। इसी रिंग्स में रहे दो नए चाँद को voyager 1 in hindi ने खोज निकाला। और इन दो नए चाँद को नाम दे दिया गया Prometheus and Pandora.

सिर्फ चाँद ही नही वॉयजर 1 ने शनि ग्रह के एक नए रिंग की भी खोज की। जिसे G rings कहा गया। वैज्ञानिको की सबसे ज्यादा रूचि वाले चाँद टाइटन की तस्वीरें और जानकारी वॉयजर 1 के द्रारा ही मिली।

अब यही पर वॉयजर 1 का मिशन पूरा हो चूका था। अब उसे एक अंजान सफर पर जाना था। एक ऐसा सफर जिसका कोई अंत नही था और आगे क्या होगा उसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल था। अब वह जाने वाला था सूर्य मंडल के बाहर।

अब यह यान एक अंजान सफर पर निकल पड़ा। आप लोगो के मन में आ रहा होगा की अभी यूरेनस और नेप्च्यून जैसे ग्रह तो बाकी है। लेकिन voyger 1 का सफर सिर्फ शनि तक ही था, बाकी दो ग्रहो के लिए Voyager 2 को चुना गया था, जो गुरु ग्रह के बाद जाने वाला था।

Interstellar space enter in hindi

सबसे पहले तो आपको यह जानने की जरूरत है कि Interstellar space किसे कहते है। हमारा सूरज अपने अंदर से कणो को उत्सर्जित करता है। यह कण बहोत तेज गति से अंतरिक्ष में सफर करते है। जिसे सोलर विंड कहा जाता है।

लेकिन एक समय पर यह कण रुक जाते है और उसके साथ एक हद तक सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र भी खत्म हो जाता है। इसी सीमा को हिलियोपोस और जितने क्षेत्र तक सूर्य का यह प्रभाव बना रहता है उस क्षेत्र को हिलियोस्पेर कहा जाता है।

Interstellar space का मतलब होता है दो तारो के बीच की जगह। कोई आम जगह नही बल्कि दो तारे का प्रभाव जहाँ खत्म होता है वह धूल और गैस की एक विशाल जगह बनी हुई होती है उसे ही interstellar space कहा जाता है।

अगस्त 2012 में वायेजर 1 ने सौर मंडल को छोड़ा। मतलब की वो तब हिलियोपॉस तक पहुंच गया था। फेब्रुआरी 2018 में यह हम से 21.2 अरब किलोमीटर दूर था।


Conclusion of Voyager 1 in hindi

नासा के वैज्ञानिको ने यह कहा है कि इसके अंदर थ्रेस्टर लगे हुई है जिसे 37 सालो से इस्तमाल नही किया गया था, लेकिन बाद में इसकी टेस्टिंग की और यह अभी भी पूरी तरह से काम कर रहे है। इसका उपयोग करके हम Voyager 1 in hindi की जीवन क्षमता को 2 से 3 साल तक बढ़ा सकते हैं।

अभी वॉयजर 1 एक ऐसी जगह पर है जहा आसपास अँधेरे के अलावा कुछ भी नही है इसकी वजह से इसके कैमरे और कुछ साधनों को बंद कर दिया गया है जिसकी वजह से इसकी ऊर्जा को बचाकर लम्बे समय तक रखा जा सके। लेकिन अभी भी वह सूर्य मंडल में बाहर की कई सारी जरूरी जानकारी हम तक पहुंचा रहा है।

voyger 1 के अंदर एक 12 इंच की कॉपर की डिस्क रखी हुई है जिस पर गोल्ड का एक लेयर भी बना हुआ है। इस डिस्क को goldan record नाम दिया गया है। इसमें हमारे बारे में कई सारी जानकारी रखी हुई है इसके साथ हमारे सूर्य के बारे में भी बताया गया है। इसे रखने का उद्देश्य यही था कि अगर भविष्य में कभी यह यान किसी एलियन को मिले तो वो हमारे बारे में यह जान सके की अंतरिक्ष के किसी कोने में एक इंसानी सभ्यता भी रह रही है। यह डिस्क 1 अरब साल तक सुरक्षित रह सकती है।

इंसान के इतिहास में बहोत कम ऐसे मिशन हुए है जिसने इतनी सारी जानकारी को दिया हो। नासा के मुताबिक यह यान अभी कई सालों तक चलेगा लेकिन अगले पांच सालों में इसे पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा जिससे यह और भी आगे का सफर कर सके।

क्या पता यह यान किसी एलियन को मिले और वो यह जान सके की इस ब्रह्मांड में कोई इंसान जैसे प्राणी भी रह रहे है। तो बस यह थी जानकारी Voyager 1 in hindi के बारे में।

अगर आपको और भी कुछ मजेदार पढ़ना है तो आप इन तीन लेखों को भी देख सकते हो।


➡️ एलियन कहाँ है ये सवाल उठाते Fermi paradox

➡️ एक सफेद बौना तारा – white dwarf star

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