न्यूट्रॉन स्टार क्या होते है what is a neutron star

न्यूट्रॉन स्टार एक मृत तारे का बचा हुआ भाग होता है, जो किसी भी तारे के सुपरनोवा धमाके के बाद बनते है, जिसका घनत्व बहोत ज्यादा होता है और बहोत तेज गति से घूमते है। चलिए यह सब विस्तार से जानते है की न्यूट्रॉन स्टार क्या होते है और कैसे बनते है।

न्यूट्रॉन स्टार क्या है – what is a neutron star

What is neutron star
The neutron star

जब कोई तारे के अंदर का ईंधन खत्म हो जाता है  तब वो एक लाल रंग के गोले में बदलने लगता है। जिसे हम red giant star कहते है। इस समय ईंधन खत्म होने की वजह से यह तारा खुद के केंद्र के अंदर सिकुड़ता जाता है। फिर यह लाल तारा एक बहोत बड़ा विस्फोट करता है। इस धमाके को सुपरनोवा कहते है। इस समय दौरान मतलब की धमाके के बाद भी तारे का केंद्र खुद के अंदर ही सिकुड़ने लगता है और तारे के बहार की तरफ का भाग अंतरिक्ष में अपना द्र्व्यमान ऊर्जा के रूप में छोड़ने लगता है।
अब आपके मन में सवाल होगा की जब धमाका होता है तो आखिर ऐसा क्या होता है जिससे की वो न्यूट्रॉन स्टार में बदल जाता है। मैंने आपको आगे कहा उसी तरह जब धमाका होता है तो तारे के केंद्र में तारे का सारा द्र्व्यमान समाने लगता है और बाहरी तारे की बाहरी सतह द्र्व्यमान को ऊर्जा के रूप में अंतरिक्ष में छोड़ता है। इस समय केंद्र में द्र्व्यमान जमा होता जाता है। और आपको तो पता ही होगा की अगर किसी भी चीज का द्र्व्यमान ज्यादा होगा तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल भी ज्यादा होगा। अब केंद्र में इतना द्र्व्यमान जमा हो जाएगा की उसका गुरुत्वाकर्षण बल बहोत अधिक बढ़ जाएगा। फिर यह बल परमाणु में रहे इलेक्ट्रान और प्रोटोन पर भी असर करेगा।
परमाणु के अंदर केंद्र में रहे प्रोटोन और उसकी चारो और घुमते इलेक्ट्रान के बिच एक मजबूत न्यूक्लियर बल होता है, जो दोनों को अलग अलग रखने में मदद करता है, लेकिन जब तारे का केंद्र सिकुड़ने लगता तो इस तारे का गुरुत्वाकर्षण बल इतना अधिक हो जाता है की वो अपने खुद के अंदर रहे परमाणु के इलेक्ट्रान और प्रोटोन के बीच में रहे बल पर हावी हो जाता है और एक समय पर गुरुत्वाकर्षण बल इतना अधिक हो जाता है की वो इस न्यूक्लियर बल से भी ज्यादा हो जाता है। इसकी वजह से इलेक्ट्रान और प्रोटोन के बीच का वो न्यूक्लियर बल टूट जाता है और गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से इलेक्ट्रान और प्रोटोन दोनों आपस में मिल जाते है, जिससे वो न्यूट्रॉन पार्टिकल बन जाते है। इसी वजह से इस तरह के तारो को न्यूट्रॉन स्टार कहाँ जाता है। 
Note : आगे पढ़ने से पहले में आपको बता दू की सूर्य के द्र्व्यमान को M के द्रारा दिखाया जाता है, जिससे समझने में सरलता हो।

न्यूट्रॉन स्टार का घनत्व और द्र्व्यमान mass and density of neutron star

जिस तारे का द्रव्यमान उसके जीवन के समय 8M ( 8 सूर्य के द्र्व्यमान जितना ) के आसपास या इससे अधिक होता है, वो एक न्यूट्रॉन स्टार बनने के काबिल होता है। जब यह न्यूट्रॉन स्टार में परिवर्तित होता है तब उसका माँस कम हो जाता है, एक न्यूट्रॉन स्टार का माँस लगभग 1.5M जितना होता है और लंबाई लगभग 15 किलोमीटर जितनी होती है। एक पदार्थ जिसका द्र्व्यमान हमारे सूर्य से 1.5 गुना ज्यादा है और आकार बस 15 किलोमीटर जितना, तो अब आप सोचिये की इसका घनत्व और गुरुत्वाकर्षण बल कितना होगा।
किसी भी न्यूट्रॉन तारे का द्रव्यमान कम से कम 1.1M और ज्यादा से ज्यादा 2.16M जितना होता है। वैसे अब तक खोजे गए तारो मे से सबसे छोटा तारे का द्र्व्यमान 1.39M ही मिला है। माना जाता है की अगर किसी भी तारे का द्र्व्यमान 2.16M से अधिक होगा तो वो ब्लेक होल में परिवर्तित हो जाएगा।
अब तक खोजे गए सारे ब्लेक होल में से सबसे छोटे ब्लेक होल का द्र्व्यमान 5M खोजा गया है। अब यहां पर वाल ये आता है की 2.16M – 5.0M के बिच के द्रव्यमान वाले तारो का क्या होता है। अभी तक हमे ऐसा कोई तारा नही मिला है, जिसका द्र्व्यमान इसके बीच हो, वैज्ञानिको का मानना है की यह quark stars और electroweak stars हो सकते है, लेकिन इस तरह के तारे अभी तक सिर्फ काल्पनिक ही बने हुए है, हमे अभी तक ब्रह्मांड में इस तरह के कोई भी तारे मिले नहीं है।
अभी साल 2019 में वैज्ञानिको ने अब तक के सबसे बड़े न्यूट्रॉन स्टार को खोज निकाला है। इसका द्र्व्यमान हमारे सूर्य से 2.14 गुना ज्यादा है और इसका विस्तार 20 किलोमीटर जितना है। यह न्यूट्रॉन तारा उस सीमा पर है की उसे ब्लेक होल में परिवर्तित हो जाना चाहिए। इसीलिए वैज्ञानिक इसकी जाँच करके ब्लेक होल को समझने का प्रयत्न कर रहे है।

न्यूट्रॉन स्टार के बारे में about neutron star

जब यह बनते है तब इसकी सतह का तापमान 6,00,000 K जितना होता है। और उस समय यह बहोत तेज गति से घूमते है। लेकिन एक बार न्यूट्रॉन स्टार बनने के बाद वो समय के साथ शांत होने लगता है। इसके तापमान और घूमने की गति कम होती जाती है। वैसे अब तक का सबसे तेज तारा एक सेकंड में 716 चक्र को समाप्त करता है। इतनी तेज गति और बहोत ज्यादा घनत्व की वजह से गुरुत्वाकर्षण बल बहोत ज्यादा बढ़ जाता है। इसका गुरुत्व बल पृथ्वी की तुलना में 900 अरब (900 billion) गुना अधिक होता है। अगर आप इसमें से एक चम्मच जीतना पदार्थ लेंगे तो वो आधे किलोमीटर में फैली पृथ्वी के वजन के बराबर होगा। इतना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल होने की वजह से इसकी escape velocity 1,00,000 – 1,50,000 जितनी होती है, जो प्रकाश की गति के तीसरे हिस्से जितनी है।
कुछ न्यूट्रॉन स्टार घूमने के साथ साथ एलक्ट्रोमेग्नेटिक रेडियेशन का भी उत्सर्जन करते है इस तरह के तारो को pulsar कहा जाता है। कुछ तारो का चुम्बकीय क्षेत्र कई ज्यादा होता है, इसोलिये उसे megnetar कहते है। लेकिन खोजे गए कुछ तारे ऐसे भी है जो रेडिएशन पल्स भी उत्सर्जन करते है और भारी चुम्बकीय क्षेत्र भी बनाते है। इन तारो को pulsar + megnetar कहते है। 
Fun fact : न्यूट्रॉन स्टार की खोज से पहले जब इसमें से विकिरणों का उत्सर्जन होता और वो धरती पर डिटेक्ट किये जाते, तब ऐसा माना जाता की यह सिग्नल किसी एलियन लाइफ की तरफ से आया हुआ है, जो हमसे संपर्क करना चाहते है। लेकिन जब न्यूट्रॉन स्टार की खोज हुई तब इस थियरी को नकार दिया गया।
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