जानिए अरुण ग्रह के 11 रहस्य – Uranus in hindi

अरुण ग्रह सौरमंडल का सातवाँ ग्रह है। इतना ही नहीं, यह सौरमंडल का सबसे अजीब और रहस्यमय ग्रह भी माना जाता है।

क्यो?

इसका जवाब देना कठिन है, क्योकि इस ग्रह (Uranus in hindi) के एक नहीं बल्कि कई रहस्य है। जिनके बारे में आज आप इस लेख में जानेंगे।

और आखिर में इसके 7 अद्भुत तथ्यों को भी।

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Note: इस लेख में 11 रहस्यों को 11 भागों में बांटा गया है।

History of Uranus in hindi – अरुण ग्रह का इतिहास

यूरेनस का इतिहास बहुत ही अदभुत रहा है। यह ग्रह हमे पृथ्वी पर से नँगी आँखों से दिखाई पड़ता है। लेकिन इसकी कम चमक की वजह से प्राचीन सभ्यता इसे एक तारा समझती थी।

साल 1690 में वैज्ञानिक John Flamsteed ने इस ग्रह का 6 बार अभ्यास किया और 34 tauri नामक तारो की सूची में इसे वर्गीकृत किया।

इसके बाद Charles Le ने भी इस तारें या कहे ग्रह का 14 बार अभ्यास किया लेकिन उसे भी कुछ हाथ नहीं लगा।

लेकिन वो William Herschel ही था, जिसने 13 march 1781 में इस ग्रह को खोज निकाला। वो अपने टेलिस्कोप के जरिये कम चमकीले तारो का अभ्यास कर रहा था, तभी उसने देखा की एक तारे के लक्षण बिलकुल ही अलग दिख रहे है।

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पहले तो William ने इस तारें को एक धूमकेतु में वर्गीकृत किया। लेकिन फिर जब उसने दूसरे खगोल शास्त्री को यह बात बताई और फिर से अभ्यास किया तो पता चला की,

अब तक जिसे लोग तारा समज रहे थे वो कोई तारा नहीं बल्कि एक ग्रह था। सौरमंडल का सबसे अजीब ग्रह। जो कई रहस्य खोलने वाला था।

अब जब की इस नए ग्रह की खोज हो चुकी थी तो बारी थी उसके नाम देने की।

William का एक मित्र bode जिसने अरुण ग्रह की कक्षा की जानकारी दी थी उसने सुझाव दिया कि शनि ग्रह गुरु ग्रह का पिता है तो फिर यह नया ग्रह शनि ग्रह का पिता होना चाहिए।

इस पर से ग्रीक सँस्कृति के आकाश के देवता ouranus पर से इस ग्रह का नाम Uranus रखा गया।

यह पहला ग्रह था, जिसका नाम ग्रीक संस्कृति पर से रखा गया था, बजाय रोमन संस्कृति के।

अब जानते है अरुण ग्रह के हिंदी अर्थ के बारे में।

Uranus meaning in hindi

Uranus का हिंदी अर्थ (Uranus meaning in hindi) अरुण होता है। जो शनि ग्रह के पिता का नाम (saturn father name) है।

यूरेनस को हिंदी में हम इसे अरुण ग्रह के नाम से जानते है। यह नाम हिन्दू संस्कृति के भगवान अरुण पर से रखा गया है जो पानी के देवता है।

अब बारी है इस ग्रह के रहस्यों को खोलने की, चलिये पहले जानते है इसकी खगोलीय जानकारी को।

Uranus planet in hindi – अरुण ग्रह के बारे में

अरुण ग्रह (Uranus planet in hindi) सौरमंडल का सातवां ग्रह है जो सूर्य से 19.8 AU दूर स्थित अपनी कक्षा में घूम रहा है।

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Note: पृथ्वी और सूर्य के बीच के अंतर को 1 AU कहा जाता है।

Uranus planet आकार में बहोत बड़ा है हमारी पृथ्वी से लगभग चार गुना बडा। इस ग्रह का व्यास 51,118 km है जब की पृथ्वी का सिर्फ 12,742 km.

Size of earth and Uranus planet, what is Uranus in hindi

इसका यह आकार वरुण ग्रह से बस थोड़ा ही बड़ा है।

इतनी बड़े आकार की वजह से अरुण ग्रह सौरमंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह बन जाता है। पहले स्थान पर गुरु और शनि है।

कद में भी यूरेनस पृथ्वी से 63 गुना अधिक बड़ा है। इसका साफ़ अर्थ है कि 63 पृथ्वी इसके अंदर समा सकती है। (क्या आप अंदाजा लगा सकते है यह कितना विशाल होगा।)

पर इतना विशाल होने के बावजूद यह एक हल्का ग्रह है।

क्यों? वो आगे बताता हूं।

पर पहले जानते है इसकी कक्षा ओर घूर्णन गति के बारे में।

Orbit and rotation of Uranus in hindi – कक्षा और परिभ्रमण

यूरेनस (Uranus in hindi) की कक्षा गोल ना होकर अंडाकार है।

Orbit of Uranus planet, अरुण ग्रह की कक्षा

इसी अंडाकार कक्षा पर सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में यूरेनस को 84 साल लग जाते है। जिसका अर्थ है कि वहां का एक साल हमारे 84 साल के बराबर है।

मजेदार बात तो यह है कि जब यूरेनस ग्रह की खोज हुई थी तब से लेकर 2033 तक वो सूर्य के सिर्फ 3 चक्र ही पूरा करेगा।

लेकिन Uranus planet अपनी कक्षा पर जितना धीमा है उतना ही वो अपनी घूर्णन गति पर तेज है।

जहा पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में 24 घँटे लगते है वहाँ यूरेनस सिर्फ 17 घंटे 14 मिनट में ही अपना काम निपटा लेता है।

इतना ही नही, Uranus बाकी ग्रहों की तुलना में उल्टी दिशा में घूमता है। इसी वजह से Uranus पर सूर्य पश्चिम से उदय होता है और पूर्व में अस्त।

ग्रह के कक्षा और घूर्णन गति की जानकारी के आगे अरुण ग्रह के पास कुछ ऐसा है जो बाकी ग्रहों के पास नहीं।

और वो किसी अजूबे से कम नहीं है। चलिये जानते है क्या है वो।

Uranus tilt – अक्षीय जुकाव

Uranus planet अंतरिक्ष में 97.77 डिग्री झुका हुआ है।

तो इसमें अजीब बात क्या है।

हमारी पृथ्वी अंतरिक्ष में 23 डिग्री ही झुकी हुई है, जिससे यह अपनी धुरि पर 23 डिग्री के कोण में घूमती है। लेकिन यूरेनस….

वो तो 97 डिग्री जुका हुआ है, जो पूरी तरह से टेढ़ा बन जाता है।

अरुण ग्रह का अक्षीय झुकाव, axis of Uranus in hindi

इसी वजह से अरुण ग्रह का एक ध्रुव 42 साल तक सूर्य के सामने रहता है और दूसरा ध्रुव 42 साल तक अंधकार में डूबा रहता है।

लेकिन इसमें एक अजीब बात यह देखने मिली, की Uranus के ध्रुव के बदले उसके बीच का भाग ज्यादा गर्म है।

इसके पीछे की वजह अभी भी एक रहस्य है।

लेकिन झुकाव की वजह सामने है।

माना जाता है कि, बहुत समय पहले पृथ्वी के आकार का एक खगोलीय पिंड अरुण ग्रह से टकराया था, जिससे यह इतना झुक गया।

अब बारी है यूरेनस (Uranus in hindi) की रचना की।

Structure and formation – अरुण ग्रह की रचना और बनावट

गैस और धूल का विशाल बादल जिसे नेब्यूला कहा जाता है उसमें से ही हमारे सौरमंडल का जन्म हुआ था।

बादल में रही धूल और गैस गुरुत्वाकर्षण बल के चलते जमा होने लगे। जहां ज्यादा भाग इकठ्ठा हुआ वहाँ सूर्य की रचना हुई और जो भाग बच गया उसमे से बने ग्रह।

वो दो ग्रह जिसमें बर्फ की मात्रा ज्यादा थी, वो अरुण और वरुण थे।

यह अंदाजा लगाया जा रहा है यह दोनों ग्रह बनने के समय सूर्य के नजदीक थे, पर फिर कुछ समय बाद वो दूर हो गए।

अब थोड़ी गहराई से जानते है की अरुण ग्रह किससे बना है।

अरुण ग्रह के गठन के तीन स्तर है। कोर, आवरण और वायुमंडल।

अरुण ग्रह की रचना, structure of Uranus planet in hindi

यूरेनस की कोर पत्थर और लोहे से बनी है।

इसके ऊपर ऐमोनिया, पानी और मीथेन के बने हुए बर्फ का आवरण है।

इस आवरण में 80% बर्फ है। इसी वजह से अरुण ग्रह को ice giant planet कहा जाता है।

इस आवरण पर गर्म घना तरल पदार्थ घूम रहा है।

माना जाता है कि Uranus के इसी आवरण के अंदर बहुत ही ज्यादा दबाव और तापमान की वजह से वहाँ के कार्बन अणु डायमंड में परिवर्तित हो जाते है। जिससे वहां डायमंड की बारिश होती है।

Atmosphere of Uranus in hindi – अरुण ग्रह का वायुमंडल

यूरेनस का वायुमंडल (Atmosphere of Uranus in hindi) हायड्रोजन और हीलियम गैस से मिलकर बना है।

साथ ही इसमें कुछ मात्रा में पानी और मीथेन गैस भी है।

यही मीथेन गैस से बने बादल सूर्य से आने वाले UV किरणों को सोख लेते है। जिससे अरुण ग्रह का रंग हमे हरा-ब्लू जैसा दिखाई देता है। इसीलिये इसे ग्रीन ग्रह भी कहा जाता है।

इन्ही बादलों के साथ वहां की हवा 900 km/h की गति से चलती है। लेकिन इसमें एक अजीब बात देखने मिली है।

विषुववृत्त जो की ग्रह का बिच का भाग होता है वहाँ यह हवा घूर्णन गति के विरुद्ध चलती है, जब की ध्रुव के पास यह समान दिशा में चलती है।

यह क्यों और कैसे होता है वो हमे अभी तक पता नही चला है।

लेकिन वायुमंडल को जरूर जानते है।

Uranus planet की कोई सतह ना होने की वजह से इसका वायुमंडल बहुत अंदर तक फैला जुआ है।

यूरेनस के वायुमंडल के तीन स्तर हैं।

Troposphere:
वायुमंडल का यह स्तर -300 km से 50 km की ऊंचाई तक फैला हुआ है। स्तर के सबसे नीचे 320k तापमान रहता है।

लेकिन ऊंचाई के साथ यह तापमान कम हो जाता है। 50 km की ऊंचाई पर यह तापमान सिर्फ 53k ही रहता है।

Stratosphere:
Troposphere के बाद यह स्तर शुरू आता है। जो 40 km से 4,000 km की ऊंचाई तक फैला हुआ है।

वायुमंडल के इस स्तर में तापमान के लक्षण Troposphere से उल्टे है। यहाँ ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता है।

जहाँ इसके सबसे निचले हिस्से पर तापमान 32k होता है वहाँ सबसे ऊपर 850k तक पहुंच जाता है।

Thermosphere:
यह अरुण ग्रह के वायुमंडल का सबसे बाहरी स्तर है। जो 4,000 km से 50,000 km की ऊंचाई तक फैला हुआ हैं।

इतना क्षेत्र होने के बावजूद भी यहाँ सारी जगहों पर तापमान लगभग समान ही रहता है। 800-850 k के बीच।

यहा इतना तापमान होने की वजह मीथेन बादल है जो सूर्य के किरणों को सोखकर गर्मी उत्पन्न करते हैं।

Uranus Moons – अरुण ग्रह के उपग्रह

हमारी पृथ्वी के पास एक ही चाँद है जब की Uranus के अब तक 27 उपग्रहों की खोज हो चुकी है और संभावना है कि और भी होंगे।

इन सबके नाम अंग्रेजी साहित्य के William Shakespeare’s की किताब “A Midsummer Night’s Dream” और Alexander Pope की किताब “The Rape of the Lock” से लिए गए है।

शुरुआती समय में जब इसके कुछ उपग्रहों की खोज हुई थी तब उनको इन्ही किताबों में से नाम दिए गए थे। फिर आगे जैसे नए उपग्रह की खोज होती गई वैसे यह प्रथा भी चलती गयी।

अरुण ग्रह के सबसे बड़े दो उपग्रहों की खोज William ने ही की थी।

फिर अगले 10 उपग्रहों की खोज वॉयजर 2 यान ने साल 1986 में की। जब वो इस ग्रह के ऊपर से निकला था। इन उपग्रहों का आकार 26- 154 km जीतना ही था।

फिर, आखिर में हबल टेलीस्कोप के जरिये यूरेनस के सारे चंद्रमा के बारे में पता चला।

हबल टेलीस्कोप द्वारा ढूंढे गये चंद्रमा का आकार सिर्फ 12-16 km जितना ही है। जो रंग में भी बहुत काले है।

इसी वजह से उन्हें पृथ्वी पर से खोजना लगभग नामुमकिन है।

वैसे तो हमे सारे उपग्रहों के बारे में जानने की कोई जरूरत नही है, लेकिन उसके सबसे बड़े पांच उपग्रहों की जानकारी भी जरूरी है।

चलिये अब इन्ही पांच उपग्रहों के बारे में जानते है।

Uranus Moons, अरुण ग्रह के उपग्रह

Miranda: यह सबसे बड़े 5 उपग्रहों में से सबसे छोटा उपग्रह है। इसकी खोज साल 1948 में हुई थी। यह आकर में सिर्फ 470 km ही बड़ा है।

Ariel: यह चौथा सबसे बड़ा इपग्रह हैं। इसकी खोज साल 1851 में हुई थी। Ariel आकार में 1,157 km लंबा है। जो miranda से तो बहुत बड़ा है।

Ariel यूरेनस का सबसे चमकीला उपग्रह भी है। इसकी सतह पर हमे छोटे और बड़े गढ्ढे दिखाई देते है। जिससे यह पता चलता है कि इस पर उल्कापिंड की बमबारी हुइ होगी।

Umbriel: इसकी खोज भी साल 1851 में Ariel के साथ ही हुई थी। पांच उपग्रहों में यह सबसे डार्क उपग्रह है।

जो पूरी तरह से सिर्फ बर्फ से ही बना है।

Ariel की तरह इसकी सतह पर भी छोटे मोटे गढ्ढे बने हुए है। Umbriel की लंबाई 1,170 km है।

Titania: यह अरुण ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह है। इसकी त्रिज्या 1,578 km है। जो की हमारे चंद्रमा से आधी है। इसकी खोज william hershel ने साल 1787 में की थी।

Oberon: यह Uranus का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा है। इसकी खोज Titania के साथ ही हुई थी।

अब यूरेनस के बारे कुछ विशेष जानते है।

Uranus planet Rings – अरुण ग्रह की रिंग्स

सौरमंडल में सिर्फ शनि ही एक ग्रह नहीं है, जिसके पास रिंग्स हो।

जब शनि ग्रह के रिंग्स की खोज हुई थी तब वैज्ञानिकों लगा की यह शनि की एक खास विशेषता है।

लेकिन जब अरुण ग्रह की रिंग्स के बारे में पता चला, तब वैज्ञानिकों को यह एहसास हुआ की ग्रह के पास रिंग्स का होना उसके लक्षण है।

Uranus planet की रिंग शनि जितनी बड़ी और चमकीली तो नही है लेकिन उसके पास कुल मिलाकर 13 रिंग्स आयी हुई है।

Uranus rings in hindi

यह दो भागों में बंटी हुई है। inner system और outer system

Inner system में 9 रिंग्स है। यह सारी पतली और डार्क रंग की है।

जब की outer system की रिंग्स इसके मुकाबले चौड़ी और थोड़ी चमकीली है। यह हल्के से लाल और ब्लू रंग की दिखाई पड़ती है।

माना जाता है कि 60 करोड़ साल पहले किसी खगोलीय पिंड के टकराने से यह रिंग्स बनी थी।

जो सच भी हो सकता है। लेकिन जो भी हो, हम आगे आगे बढ़ते है।

magnetosphere of Uranus planet in hindi

वैसे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के बारे में जानना इतना खास नहीं है, लेकिन अरुण ग्रह सबसे अजीब है।

तो उसका magnetosphere भी अजीब होगा।

पहले तो हम यह जान लेते है कि magnetosphere की जरूरत क्या है।

ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र कोर में रही धातु में से उत्त्पन्न होता है जो दो ध्रुव को बनाता हैं। उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव।

यह ध्रुव वायुमंडल में magnetosphere बनाते है, जो सूर्य से आने वाले विद्युत कणो को ग्रह पर आने से रोकता है।

जिसके पास यह नहीं है उसे जाकर पूछिये की वायुमंडल का क्या हाल होता है। खास करके शुक्र ग्रह को। 😁

अब आते है Uranus planet पर वापिस।

यूरेनस का magnetosphere केंद्र से ना पसार होकर थोड़ा सा दक्षिण की तरफ से निकला है। साथ ही यह अक्षीय जुकाव की रेखा से 60° के कोण पर है।

जब की दूसरे ग्रहों में इतना तफावत देखने को नहीं मिलता हैं। आप हमारी पृथ्वी को ही देख लीजिए।

Uranus magnetosphere, what is Uranus in hindi

परिणाम स्वरूप उत्तर ध्रुव का चुंबकीय प्रमाण दक्षिण की तुलना में 10 गुना ज्यादा है। (वहा पर होकायंत्र के काम करने की संभावना भी कम है।)

Life and Mission – जीवन और मिशन

Uranus in hindi पर सतह ना होने की वजह से वहां पर जीवन संभव नहीं है।

दूसरा, वहाँ का तापमान और भयानक दबाव जीवन को पलभर में नष्ट कर सकता है।

लेकिन फिर भी वहाँ पर जाने की आप सोच रहे तो आपको वहाँ मिलेगा क्या।

सिर्फ बर्फ ही बर्फ।

अरुण ग्रह पर किये गए मिशन भी लगभग ना के बराबर है। अब तक सिर्फ वॉयजर 2 यान ने ही अरुण ग्रह का अभ्यास किया है।

Voyager 2 in hindi

इस यान ने यूरेनस के बारे में हमे कई सारी जानकारी दी थी। जब वो ब्रह्मांड के सफर में निकला था।

Uranus पर मिशन के लिए एक समस्या यह है कि वहाँ पर जमीन ना होने की वजह से यान को लेंड नही करा सकते। साथ ही उसका वायुमंडल भी यान को नष्ट करने की क्षमता रखता है।

इतनी कठिनाई के बावजूद NASA दोनों ice giant planet पर मिशन की तैयारी कर रहा है।

यहाँ पर हमारे 11 रहस्य समाप्त होते है। अब अरुण ग्रह से जुड़े कुछ तथ्य जानते है।

Uranus facts in hindi – अरुण ग्रह के तथ्य

यह पहला ऐसा ग्रह था जो टेलिस्कोप के जरिए खोजा गया था।

अरुण ग्रह पर सूर्य की रौशनी को पहुंचने में 2 घंटे 40 मिनट लगते है।

मीथेन गैस के चमकने की वजह से Uranus planet को हम रात को आसानी से देख सकते है। वो भी बिना किसी टेलिस्कोप के। बस वातावरण साफ़ होना चाहिए।

अरुण ग्रह पर पड़ने वाले प्रकाश की तीव्रता पृथ्वी की तुलना में 400 गुना कम है।

अरुण और वरुण ग्रह दोनों लगभग सामान है। इन्हें जुड़वाँ भी कहा जाता है।

अरुण और वरुण ग्रह, Uranus and neptune in hindi

सौरमंडल में सिर्फ दो ही ग्रह उल्टी दिशा में घूमते है। पहला है शुक्र और दूसरा है अरुण।

साल 2051 में यूरेनस पृथ्वी के सबसे ज्यादा नजदीक होगा। सिर्फ 17.2 AU दूर।

तो बस यह थी अरुण ग्रह (Uranus in hindi) से जुडी अद्भुत जानकारी। अब बारी आपकी है कॉमेंट में बताने की की यह अदभुत जानकारी आपको कैसी लगी।

एक बात और, अगर आपको इससे भी ज्यादा कुछ रोमांचक पढ़ने क मन है तो इस लेख को एकबार जरूर देखिये।

👉 वरुण ग्रह की अदभुत जानकारी (7 amazing facts)

 

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