बुध ग्रह के बारे में सारी जानकारी | mercury in hindi

आप बुध ग्रह को हमारे सौरमंडल का सबसे पहला ग्रह कह सकते हो। वैसे तो यह बहुत छोटा है और यहाँ का वातावरण रहने योग्य भी नही है लेकिन फिर भी यह अपनी एक अनोखे ग्रह में जगह बनाया हुआ है। 

बुध ग्रह के बारे में

बुध ग्रह जिसे mercury के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्रह हमारे सौरमंडल में सूर्य से सबसे नजदीक है। लेकिन फिर भी सबसे गर्म ग्रह शुक्र है और उसके बाद बुध ग्रह का नंबर आता है। बुध का व्यास 4,879 किलोमीटर जितना ही है, जिसकी वजह से वो सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह कहलाता है। अगर इसकी तुलना करें तो इसका आकार लगभग हमारे चाँद जितना ही है।
Mercury planet
Mercury planet |credit: vigyanam.com

जैसे हमारी पृथ्वी सूर्य की चारो और अपनी परिक्रमा कर रही है उसी तरह बुध भी सूर्य की चारो ओर परिक्रमा कर रहा है, लेकिन बुध ग्रह की परिक्रमा बहुत अजीब है। पहली तो उसका पथ गोल ना होकर अंडाकार है। जिसकी वजह से कुछ समय ऐसा आता है जिससे वह सूर्य के काफी नजदीक रहता है और कुछ समय के लिए सूर्य के काफी दूर चला जाता है। ऐसा होने की वजह से बुध ग्रह के तापमान में भारी बदलाव आता है और एक यह कारण है जिससे इंसान बुध ग्रह पर जीवन नही बना सकता।

बुध ग्रह का परिभ्रमण

जब हमारी पृथ्वी अपनी धरी पर एक घूर्णन समाप्त करता है तब उसे एक दिन माना जाता है और एक दिन में हमे एक सूर्योदय और एक सूर्यास्त देखने को मिलता है। लेकिन बुध ग्रह पर प्रत्येक घूर्णन के साथ सूर्योदय और सूर्यास्त देखने को नही मिलता। इसकी सबसे बड़ी वजह उसकी तीव्र गति है। गती के कारण बुध के कुछ जगहों पर एक ही दिन में सूर्य उदय होता है और अस्त भी हो जाता है। ऐसा सूर्यास्त के समय भी होता है। बुध ग्रह को अपनी ही धरी पर एक घूर्णन पूरा करने में 59 दिन लगते है। जब की हमारी पृथ्वी को 24 घंटे या फिर कहे सिर्फ 1 दिन ही लगता है।
बुध ग्रह पर एक सौर दिन समाप्त होने में 176 दिन लगते है। एक सौर दिवस मतलब एक ही जगह पर सूर्योदय से लेकर दूसरे सूर्योदय होने का समय। अगर हम बात करे सूर्य के चारो और एक चक्कर पूरा करने की तो बुध ग्रह को सिर्फ 88 दिन ही लगते है।

बुध ग्रह का वातावरण

बुध ग्रह का वायुमंडल लगभग ना के बराबर है। यहाँ पर दिन के समय 430 डिग्री सेल्सियस तापमान हो जाता है जब की रात के समय मायनस 173 डिग्री सेल्सियस जितना हो जाता है। वायुमंडल ना होने की वजह से तापमान में इतना बड़ा तफावत देखने को मिलता है। नासा के अनुसार बुध के वायुमंडल का 42% ऑक्सीजन, 29% सोडियम, 22% हाइड्रोजन, 6% हीलियम और कम मात्रा में अन्य तत्व और गैस है।

बुध ग्रह की जमीन

ऐसा देखा गया है कि बुध ग्रह की ज्यादातर सतह चाँद जैसी ही है। इसकी जमीन तीन तरह की बनी हुई है। क्रेटर-गढ्ढे, मैदान और विशाल चट्टानें। बुध ग्रह पर ज्यादातर विशाल आकार के गड्ढे बने हुए है। यह गढ़े कई किलोमीटर लंबे और 3 किलोमीटर जितने गहरे है। अब तक का सबसे बड़ा जो गढ्ढा पाया गया है वो 1550 किलोमोटर जितना लंबा है।

खगोलीय घटना

चलिए जानते है इस विशाल गढ्ढे होने की वजह। लगभग आज से 4.5 अरब साल पहले बुध का निर्माण हो रहा था। उस समय गैस और धूल जैसी चीजें गुरुत्वाकर्षण की वजह से एक दूसरे से मिल रही थी। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही एस्टरॉयड और धूमकेतु जैसी खगोलीय चीजे बुध से टकराई और उस पर इतने विशाल गढ्ढे का कारण बनी। बुध का कोर उसके आकार की तुलना में काफी बड़ा है। इस वजह से वैज्ञानिको का यह भी मानना है कि जब बुध ग्रह की रचना हुई थी तब यह आज की तुलना से कई गुना बड़ा था, लेकिन धूमकेतु और अस्टोरॉइड के टकराने की वजह से इसका आकार छोटा हो गया। दूसरा कारण यह भी है कि सूरज से इतने करीब होने की वजह से उसका कुछ हद तक का द्रव्यमान जल गया होगा।

पृथ्वी से तुलना

हमारा जो चाँद है उसे हम अपनी पृथ्वी का उपग्रह कहते है। लेकिन बुध ग्रह के पास अपना कोई चाँद मतलब की कोई उपग्रह नही है। बात करे इसके चुम्बकीय क्षेत्र की तो यह लगभग हमारी पृथ्वी से 1% जितना ही है। हमारी पृथ्वी और बुध में समानता यह है कि दोनों का केंद्र लोहे से बना हुआ है। बुध ग्रह पृथ्वी से 26 गुना छोटा है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की दोनों के केंद्र का कोर समान आकार का है। दूसरी भाषा में कहे तो बुध का कोर उसके आकर की तुलना में थोड़ा नही बल्कि बहोत बड़ा है। बुध ग्रह की घूमने की गति भी बहोत तेज है, जहाँ पृथ्वी एक सेकंड में 29.78 किलोमीटर की रफ्तार से चलती है वहाँ दूसरी तरफ बुध की गति 47.362 किलोमीटर है।

बुध पर किये गए मिशन

सूर्य के नजदीक होने के कारण बुध ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजना बहुत कठिन होता है। अब तक सिर्फ दो ही मिशन इस पर किये गए है। साल 1974 में मेरिनर-10 और फिर साल 2008 में मैसेंजर नाम के यान को बुध की कक्षा में भेजा गया। बुध ग्रह की सबसे पहली फोटो भेजने वाला अंतरिक्ष यान मेरिनर 10 ही था। बुध की सतह चाँद जैसी है, यह माहिती भी इन अंतरिक्ष यान द्रारा ही पता चली थी। अब अगला मिशन साल 2025 में होने वाला है जिसका नाम BepiColombo है।

बुध ग्रह के बारे में तथ्य amazing facts

 बुध ग्रह को अंग्रेजी भाषा में mercury कहते है। यह नाम रोमन देवता के नाम पर से रखा गया है।
बुध के परिभ्रमण की धरी सिर्फ 2 डिग्री ही जुकी हुई है। इसी वजह से यहाँ पर मौसम परिवर्तन नही होता है।
बुध ग्रह का पथ अंडाकार होने की वजह से सूर्य से उसकी दुरी अलग अलग होती है। सबसे निकट दुरी 4.7 करोड़ और सबसे ज्यादा दुरी 7 करोड़ किलोमीटर की होती है। सबसे नजदीक वाले बिंदु को Perihelion और सबसे दूर वाले बिंदु को Aphelion कहते हैं।
सूर्य के किरणों को बुध ग्रह की जमीन पर पहुँचने में 3.2 मिनिट ही लगते है जो पृथ्वी (8.3 मिनट) की तुलना में बहोत कम समय है।
बुध इतनी तेजी से घूमता है कि प्राचीन सभ्यताओं को यह दो अलग अलग तारे दीखते थे। एक सुबह और एक श्याम को। इसी वजह से बुध को सुबह का तारा, सूर्योदय का तारा, श्याम का तारा और सूर्यास्त का तारा जैसे नाम दिए गए है।
वैसे कहने को तो यह एक छोटा ग्रह है लेकिन इसकी घनता हमारी पृथ्वी के बाद दूसरे स्थान पर आती है, जब की सौरमंडल में गुरु और शनि जैसे बड़े ग्रह भी मौजूद है।

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