मंगल ग्रह के बारे में सारी जानकारी | mars planet in hindi

 सूर्यमंडल का एक ऐसा ग्रह जहाँ पर वैज्ञानिक भविष्य में रहने की सोच रहे है। क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि पुरे सौरमंडल में सिर्फ यह ग्रह इंसानो के रहने लायक है। तो चलिए जानते है मंगल ग्रह के बारे में कुछ अनसुनी बाते।

मंगल ग्रह mars planet in hindi

इस ग्रह को लाल ग्रह यानी की red planet भी कहाँ जाता है। यह की जमीन पर काफी मात्रा में आयरन ऑक्साइड है जो गहरा लाल रंग का होता है। इसकी वजह से यह ग्रह लाल रंग का दिखाई देता है। यह ग्रह सूर्य के चौथे नंबर पर है और पूरे सौरमंडल में दूसरा सबसे छोटा ग्रह है। पहले स्थान पर बुध ग्रह का नाम आता है। वैसे सूर्य से मंगल की दुरी लगभग 227,940,000 किमी है। इतनी दुरी होने की वजह से यहाँ पर कुछ जगहों पर तापमान में बहोत ज्यादा बदलाव होता है।

Mars planet in hindi
Mars planet

मंगल के उपग्रह Phobos and deimos

हमारी पृथ्वी के पास एक ही उपग्रह है जिसे हम चाँद के नाम से जानते है। लेकिन mars के पास दो उपग्रह या कहे की दो चाँद है। उसके नाम फोबोस और डेमोस है। आपको लग रहा होगा की ये कैसे नाम है, असल में  यह ग्रीक भाषा के शब्द है जहाँ पर फोबोस अर्थ होता है “भय”। इसलिये ग्रीक लोग मंगल को “भय का देवता” भी कहते थे। वही फोबोस का अर्थ  “शुक्र का बेटा” होता है।

पृथ्वी और मंगल ग्रह earth and mars

अब चलिए मंगल ग्रह की हमारी पृथ्वी से तुलना करते है। हमारी पृथ्वी पर एक दिन 24 घंटे का होता है जब की मंगल ग्रह पर यह दिन 24 घँटे 37 मिनिट के आसपास का होता है। मंगल ग्रह को सूर्य की परिक्रमा करने में लगभग 687 दिन लगते है जब की हमारी पृथ्वी को 365 दिन ही लगते है। दूसरे शब्दों के हम कह सकते है कि mars planet पर एक साल पृथ्वी से दुगना बड़ा होता है। इसका व्यास भी हमारी पृथ्वी से लगभग आधा है। इसकी वजह से वहाँ का गुरुत्वाकर्षण बल भी पृथ्वी की तुलना में बहोत कम है। लगभग 3 गुना कम। इसकी वजह से अगर हम वहाँ की जमीन पर कूदेंगे तो पृथ्वी की तुलना में 3 गुना ज्यादा ऊपर उड़ेंगे।

मंगल ग्रह के मिशन mission  of mars planet

मंगल ग्रह पर सबसे पहला mission साल 1960 में लॉन्च किया था, जो की असफल रहा था। लेकिन उसके बाद कई मिशन किये गए। वैज्ञानिको ने mars प्लेनेट के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अब तक 39 अंतरिक्ष मिशनो को अंजाम दिया है जिसमे से सिर्फ 16 मिशन ही सफल हुए है। अगर सारे प्रकार के मिशन को मिला लिया जाए तो मिशन के सफल होने का दर लगभग 66% जितना है।

भारत की रिसर्च संस्था इसरो ने भी 5 नवंबर 2013 में एक मंगल ग्रह पर एक मिशन किया था, जो 24 दिसंबर 2014 को सफल रूप से मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित भी किया गया था। भारत ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर सफलता हांसिल की थी। वो भी बहोत कम बजेट में। इस मिशन का बजट 450 करोड़ था जब की अमेरिका का एक मंगल मिशन 2000 – 3000 करोड़ के आसपास होता है। इससे आप समझ सकते हो की इसरो और भारत के लिए यह कितने गर्व की बात रही होगी। इसके साथ ही अपने पहले ही प्रयास में सफल होने वाला भी पहला देश बन गया था।

NASA का एक mars orbiter है जो पिछले 11 सालो से मंगल ग्रह की परिक्रमा कर रहा है। अभी हाल ही में इस ऑर्बिटर ने प्लेनेट पर एक कृमि जैसी अजीब एलियन चीज को देखने का दावा किया गया है। यह कितनी हद तक सच है उसके बारे में अभी जानकारी नहीं प्राप्त हुई है।

Olympus Mons

मंगल ग्रह पर एक विशाल ज्वालामुखी बना हुआ है जिसकी ऊंचाई 21 किलोमीटर और व्यास 600 किलोमीटर के आसपास है। इसका नाम Olympus mons है। यह इतना बड़ा है कि यह सिर्फ मंगल ग्रह का ही नही बल्कि पूरे सूर्य मंडल का सबसे ऊंचा पर्वत है। आपने माउन्ट एवरेस्ट के बारे में तो सुना ही होगा। जो हमारी पृथ्वी का सबसे ऊँचा पर्वत है। इसकी ऊंचाई 8.8 किलोमीटर है। दोनों पर्वत की ऊंचाई की तुलना करके आप समझ सकते हो की Olympus mons कितना बड़ा होगा। इसके साथ चौकाने वाली बात तो यह है कि यह पर्वत एक ज्वालामुखी है। वैज्ञानिको की माने तो यह ज्वालामुखी अभी भी सक्रिय है। सोचिये जब इतना विशाल ज्वालामुखी फटेगा तो कितना भयानक दृश्य होगा।

Olympus Mons in hindi
Olympus mons

Valles Marineris

चलिए आपको में मंगल ग्रह से जुडी एक और अनोखी बात बताता हूं। मंगल ग्रह पर valles marineris नाम की एक खाई बनी हुई है है। इसकी लंबाई 400 किलोमीटर चौड़ाई 200 किलोमीटर और गहराई 7 किलोमीटर तक की है। यह खाई सिर्फ मंगल ग्रह की ही नही बल्कि पूरे सौरमंडल की सबसे पड़ी खाई है। पता नही इसके अंदर क्या क्या होगा।

मंगल ग्रह पर पानी की तलाश

आपको जानकर हैरानी होगी की मंगल ग्रह पर एक भी समंदर या नदी नही है। दूसरी तरह कहे तो मंगल ग्रह पर पानी का कोई स्त्रोत नही है। मंगल ग्रह पर रिसर्च करने का सबसे बड़ा कारण भी यही है। लेकिन अभी तक कहीँ पर भी पानी मिला नही है। रिसर्च से वैज्ञानिक अंदाजा लगा रहे है कि भुतकाल के समय में मंगल ग्रह पर पानी था। क्योंकि कुछ ऐसे निशान मिले है जो बताते है कि पानी का यहाँ पर बहाव रहा होगा।

मंगल ग्रह पर पानी न होने की एक सबसे बड़ी वजह उसका वायुमंडल है। उसका वायुमंडल बहुत ही पतला है। इसकी वजह से ग्रह पर उसका दबाव कम बनता है जिससे वायुमंडल इतना कमजोर हो जाता है की तरल पदार्थ मंगल ग्रह की जमीन पर स्थिर नही रह सकता है।

वैसे मंगल ग्रह के दोनों उत्तर और दक्षिण ध्रुव बर्फ से ढंके हुए है। यहाँ पर बर्फ की मात्रा काफी ज्यादा है। अंदाजा लगाया गया है कि अगर दक्षिण ध्रुव का बर्फ पिघल जाए तो वो पुरे ग्रह को 11 मिटर जितने पानी में समा लेगा। लेकिन अभी ऐसा होना संभव नही है। वैसे भी mars planet को एक ठंडा ग्रह माना जाता है।

मंगल ग्रह के बारे में तथ्य Amazing Facts About mars

पृथ्वी से मंगल ग्रह की यात्रा के दौरान दो साल जितना समय लगता है।

हम मंगल ग्रह को रात में अपनी आँखों से देख सकते है बस आसमान साफ होना चाहिए।

मंगल ग्रह पर ज्यादातर कार्बन डाइऑक्साइड है। उसका प्रमाण 95% नाइट्रोजन का 3% और बाकी सारे वायु का प्रमाण मिलाकर 2% है।

मंगल ग्रह का अंग्रेजी नाम mars है, जो रोमन के एक देवता के नाम पर से रखा गया है।

साल 1609 में गेलिलियो ने एक दूरबीन का उपयोग करके मंगल ग्रह का अवलोकन किया था।

मंगल ग्रह का कोई चुम्बकीय क्षेत्र नही है। माना जाता है की अरबो साल पहले एक घटना हुई थी जिसकी वजह से इसका चुम्बकीय क्षेत्र नष्ट हो गया।

साल 2030 तक नासा की मंगल ग्रह पर इंसानो की एक स्वतंत्र कॉलोनी बनाने की योजना है।

यह थी कुछ मंगल ग्रह (mars planet ) के बारे में जानकारी। अगर आपको ऐसी और जानकारी चाहिए तो आप हमारी इस वेबसाइट को देख सकते है।

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