String theory ब्रह्मांड के 26 आयाम

आप पहले string theory के पहले भाग को पढ़े जिस से यह भाग आपको समझ में आए।
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String theory पर पहले लोगॉ ने ज्यादा ध्यान नही दिया क्योंकि इसमें उनको कुछ फनी जैसा लगता था। और वो थे इस थियरी के 26 आयाम और टेकयोन्स। अब आपको पता ना हो तो बता दू की हम जिस दुनिया में रहते है वो तीन आयामो वाली है। और स्ट्रिंग थियरी 26 आयाम पर आधारित थी। इसीलिए यह कुछ अजीब सा था। अब बात करे टेकयोन्स की तो वो एक तरह के ऐसे कण होते है जो प्रकाश की गती से भी ज्यादा तेज रफ्तार से चलते है। मतलब की उसकी गती प्रकाश से भी ज्यादा होती है। लेकिन ऐसा वास्तव में होना असंभव है। आइंस्टाइन की रिलेटिविटी थियरी के मुताबिक कोई भी चीज प्रकाश से ज्यादा गति से नही चल सकती। बस कुछ यही कारणों की वजह से स्ट्रिंग थियरी को नकारा गया था।
What is string theory
26 dimensions and tachyons 

String theory and gravity

लेकिन यह थियरी बहोत से प्रश्नों को हल करती थी। कुछ ऐसे सवाल जिसका जवाब मिलना लगभग नामुमकिन सा था। कैसे, चलो वो जानते है।
हमारी प्रकृती में कुल चार बल है। विद्युत चुम्बकीय बल, कमजोर केंद्रीय बल, मजबूत केंद्रीय बल, गुरुत्वाकर्षण बल.
[Electromagnetic force, weak nuclear force, Strong nuclear force, gravitational force.]
वैज्ञानिको के मुताबिक कोई ऐसा सिद्धांत जरूर होना चाहिए जो इन सारे बलों को एकसाथ लाता हो। लेकिन अब तक खोजी गयी थियरी सिर्फ तीन बलों को ही एक जुट कर पाती थी। गुरुत्वाकर्षण बल साथ जुड़ने में असमर्थ होता था। लेकिन स्ट्रिंग थियरी चारो बलों को एकसाथ जोड़ती है। मतलब की इससे प्रकृति के चारो बलों को एकसाथ समझने में मदद मिलती है और एक ही प्रकृति के चारो अलग अलग बल कैसे एकसाथ मिले हुए हैं यह समजा जा सकता है।

Super string theory

आगे बात हुए इसी तरह इस थियरी को कुछ हद तक हास्य में निकाल जाता था। और उसकी वजह 26 आयाम और टेकयोन्स पार्टिकल थे। लेकिन इस समस्या को जड से निकालने के लिए इस थियरी को अपग्रेड किया और बनी एक नई थियरी। सुपर स्ट्रिंग थियरी। इस थियरी में 10 आयाम थे और यह टेकयोन पार्टिकल से भी स्वत्रंत था।
इस थियरी में पांच अलग अलग सिद्धांत थे। यहा पर जो स्ट्रिंग यानि की तंतु को देखा जाता है उसे ध्यान में रखकर ही इन पांच सिद्धांतों को लिया गया है। हम जानते है कि स्ट्रिंग दो तरह की होती है। एक खुली और दूसरी बंद। भौतिक विज्ञान के नियमो के मुताबिक कोई एक खुली स्ट्रिंग दूसरी खुली स्ट्रिंग के साथ उसके अंत बिंदु (end point) से मिलकर एक नई बड़ी स्ट्रिंग  बनाएगी। इसी तरह दो खुली स्ट्रिंग के दोनों अंतबिन्दु (end point) एकदूसरे से जुड़कर एक नई बंद स्ट्रिंग बनाते है। लेकिन इसकी उल्टी प्रक्रिया संभव नही है। दो बंद स्ट्रिंग मिलकर एक बड़ी खुली स्ट्रिंग का निर्माण नही कर सकती। मतलब की खुली स्ट्रिंग के सिद्धांत में बंद स्ट्रिंग का सिद्धांत अंतनिर्मित है।

सुपरस्ट्रींग सिद्धांत के पांच प्रकार

1. स्ट्रिंग खुली हुई होती है।
2. बंद स्ट्रिंग का पहला प्रकार
3. बंद स्ट्रिंग का दूसरा प्रकार
4. साधारण स्ट्रिंग और सुपर स्ट्रिंग से मिलकर बना हुआ पहला सिद्धांत HO(SO(32))
5. साधारण स्ट्रिंग और सुपर स्ट्रिंग से मिलकर बना हुआ दूसरा सिद्धांत HE(E8 x E8)
इसमें भी एक समस्या थी। एक ही चीज को समझने के लिए अलग अलग पांच सिद्धांत कैसे? ऐसा कैसे हो सकता है कि सारे सिद्धांत एक दूसरे से विरुद्ध  हो लेकिन सही साबित होते है। इसका यह जवाब मिला की पांचों सिद्धांत अपने अपने क्षेत्र में एक हद तक सही थे। string थियरी को अभीतक प्रायोगिक  तरह से नही देखा गया है। क्योंकि एक बहोत ही सूक्ष्म  स्तर पर अभ्यास करने के लिए भारी ऊर्जा की जरूरत होती है। इस पर रिसर्च चालू है और भविष्य में पता चल पाएगा की इसका सच।

अदभुत तथ्य

स्ट्रिंग थियरी खास करके ब्लेक होल से जुडी हुई है। ब्लेक होल एक ऐसी जगह है जहां पर भौतिक विज्ञान के सामान्य नियम और क़वोंन्टम् की दुनिया के नियम दोनों साथ में मिलते है। कुछ हद तक ब्लेक होल ही जिम्मेदार है स्ट्रिंग थियरी के विचार के लिए। बस तो यही थी स्ट्रिंग थियरी।
तब तक के लिए अलविदा।

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