Dark energy ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य

अगर आपने डार्क एनर्जी के पहले भाग को नहीं पढ़ा है तो पहले आप वो पढ़े, क्योंकि यह भाग बिलकुल उसके बाद से ही शुरू हुआ है। और अगर आप वो भाग पढ़ चुके है तो शुरू रखिए इसे पढ़ना।
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3.तीसरी थियरी यह है कि आइंस्टीन की theory of gravity ही गलत है। हमे उसे फिर से समझने की जरूरत है और एक नई थियरी चाहिए जो इस डार्क एनर्जी को समजा सके। लेकिन अब तक हम theory of gravity की वजह से ब्रह्मांड के हर खगोलीय पिंड और घटनाओं को न सिर्फ समझ पाए है, बल्कि उसे सही भी पाया है। ऐसे में एक नई थियरी की कल्पना करना बहुत ही कठिन है।
4.कुछ वैज्ञानिको का यह भी मानना है कि डार्क एनर्जी एक नई तरह की डायनामिक एनर्जी है या कोई ऐसा द्रव्य है जो ब्रह्मांड की जगहों यानी की अंतरिक्ष को भरता है। वैज्ञानिको ने इसे quintessence नाम दिया है। ग्रीक के फिलोसोफर इसे पांचवा तत्व (fifth element) भी कहते है। लेकिन अगर ये quintessence ही डार्क एनर्जी का जवाब है तो अब तक हम इसके बारे में कुछ नही जानते की वो क्या है और कैसे काम करता है। बस एक रहस्य ही बना  हुआ है।
Fifth element quintessence
quintessence

dark energy का अस्तित्व
कुछ लोगो का मानना है कि डार्क एनर्जी का अस्तित्व ही नही है। हाल ही में कुछ  संशोधकों ने एक नई थियरी सामने रखी, massive gravity theory. इसके मुताबिक theory of gravity के अंदर अगर गुरुत्वाकर्षण बल के भौतिकी कण को रखा जाए तो इससे डार्क एनर्जी का रहस्य सुलझ सकता है। लेकिन यहा पर एक प्रॉब्लम ये है कि हमे अभी तक गुरुत्वाकर्षण बल के कोई मुलभुत कण नही मिले है। इसे सिर्फ काल्पनिक कण की तरह ही इस्तेमाल किया जाता है।

डार्क एनर्जी को लेकर ब्रह्मांड में भविष्य की कई संभावनाए है।

1.महा विस्फोटक: समय के साथ डार्क एनर्जी का बल बढ़ता जाएगा और एक समय यह सारे मुलभुत बलो से भी ज्यादा हो जाएगा। जिससे ब्रह्मांड की सारी चीजें यह तक की आकाशगंगा से लेकर परमाणु तक सब तबाह हो जाएगी।
2.महा संकुचन: एक समय पर डार्क एनर्जी का प्रभाव खत्म हो जाएगा और गुरुत्वाकर्षण बल उस पर हावी हो जाएगा। जिससे ब्रह्मांड के सारे खगोलीय पिंड और चीजे एकदूसरे को खींचेगी और एक बिंदु में समा जाएगी। बाद में एक महा विस्फोटक से एक नए ब्रह्मांड की रचना होगी।
3.महा शीतलन: ब्रह्मांड में रहे डार्क एनर्जी और गुरुत्वाकर्षण बल के बीच  बहुत समय तक ऐसे ही संतुलन बना रहेगा। इससे ब्रह्मांड की सारी चीजें एक दूसरे से बहुत दूर हो जाएगी। जिससे ब्रह्मांड की हर जगह ठंडी हो जाएगी और ब्रह्मांड अपने शून्य तापमान पर होगा।
कुछ खास और रोचक

याद रहे डार्क एनर्जी गुरुत्वाकर्षण बल का विरोधी बल नही है। गुरुत्व बल चीजो को एकदूसरे के नजदीक खिंचता है जब की डार्क एनर्जी दो चीजो के बीच मौजूद खाली जगह को बढाती है।
नष्ट होते तारो को सुपरनोवा कहा जाता है।
और ए सुपरनोवा बहुत ही तेज प्रकाशित होते है।
जब सुपरनोवा पर अभ्यास किया जा रहा था तब उसके प्रकाश का तेज जितना होना चाहिए उससे कम था, मतलब वो पहले से ज्यादा दूर हो चुके थे। इस तरह ब्रह्मांड के फैलने की गति को नापा जाता है।
मुलभुत चार बल: विद्युत चुम्बकीय बल, कमजोर केंद्रीय बल, मजबूत केंद्रीय बल, गुरुत्वाकर्षण बल.
[Electromagnetic force, weak nuclear force, Strong nuclear force, gravitational force.]

ब्रह्मांड में हमे अबतक 4 मुलभुत बल ही मिले है, जिन में से 3 के भौतिकी कण मिले है और गुरुत्वाकर्षण बल के कणो को काल्पनिक माना जाता है। 
आइंस्टाइन के फार्मूला e=mc^2 के मुताबिक कण या ऊर्जा को हम बना नही सकते। ब्रह्मांड में उसकी मात्रा स्थिर है। तो प्रश्न ये होता है कि ब्रह्मांड के इस खाली जगहों में ये ऊर्जा आती कहाँ से है। इसका source अब तक पता नही चला है।
जैसे जैसे ब्रह्मांड फैलेगा, डार्क एनर्जी बढ़ती रहेगी और ब्रह्मांड और ज्यादा गति से फैलेगा।
हमारा ब्रह्मांड ऐसे कई रहस्यों से भरा पड़ा है। आगे हम ऐसे एक और विषय को जानेंगे।
अगर आपके मन में अभी भी डार्क एनर्जी को लेकर कोई प्रश्न है तो कमेंट बॉक्स आपके लिए खाली ही पडा है। वहाँ पर अपने प्रश्न लिखिए मैं आपको जरूर जवाब दूंगा।
तब तक के लिए अलविदा।

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