Seven chakra सात चक्रा

आपको लग रहा होगा की जब हमारे अंदर के चक्र की बात आती है तो वो आध्यात्मिक विषय है, ज्ञान, गुरु, सन्यास और भक्त जैसा कुछ। लेकिन ऐसा कुछ नही है। हमारे अंदर के चक्र हमारे अंदर छिपी हुई ब्रह्मांड की ऊर्जा है। इन चक्रा को जाग्रत करने का अर्थ है हमारी शक्तियॉ को जगाना।

इन चक्रा को जगाने के लिए कोई सन्यास लेने की जरूरत नही है। हम आध्यात्मिक की सारी चीजें हमारे सामान्य जिंदगी में कर सकते है। तो चलिए जानते है हमारे चक्रा के बारे में।

हमारे अंदर कुल मिलाकर सात चक्र है। हर चक्र का कोई कार्य और प्रभाव होता है जो हमारे जीवन पर असर करता है। चक्रा को नीचे से लेकर ऊपर तक एक के बाद एक जाग्रत कर सकते है। तो शरू करते है सबसे पहले चक्र से।

Seven chakra name in hindi, chakra ko kaise jagaye
Seven chakras

मूलाधर चक्र 
यह चक्र सबसे पहला चक्र है। ये हमारे जीवन का मूल आधार है। इसी लिए इसे मूलाधार चक्र कहते है। हमारी ऊर्जा यहाँ पर होने से हम आम जीवन, भोग और विलास में होते है। दुनिया के लगभग ज्यादा लोग अपनी पूरी जिंदगी इन मे ही रहते है।
इसका मंत्र है लं

हमे अपने आम जीवन पर नींद और वासना पर काबू होना जरूरी है। ध्यान करते वक्त इस चक्र पर ध्यान करने से ये चक्र सक्रिय हो जाता है।

इस चक्र के जागने से हमारे अंदर से सारा डर निकल जाता है और हम हमेशा आनंद में ही रहते है।

स्वाधिष्ठान चक्र
ये हमारा दूसरा चक्र है जो मूलाधार से ऊपर होता है। अगर आप मनोरंजन, मौज मस्ती और घूमने के भाव वाले है तो आपकी ऊर्जा इस चक्र पर है।

इसका मंत्र है वं

हमारे जीवन में कभी कभी मनोरंजन और मौज मस्ती जरूरी है लेकिन इसकी आदत बनाना बुरा है तो अपने इस आदत पर काबू रहे वो जरूरी है। चक्र पर ध्यान लगाने से  हमारी ऊर्जा इस चक्र पर जाती है।

इस चक्र के जागने से आलस, क्रूरता, अविश्वास जैसे खराब गुण दूर हो जायेगें।

मणिपुर चक्र
नाभि की जगह पर होता है ये चक्र। जिस की ऊर्जा इस चक्र पर होती है वो सतत कोई काम करने की अपेक्षा रखता है। वो कोई भी कार्य करने के लिए पीछे नही हटता।

इसका मंत्र है रं

इस चक्र को जगाने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाना जरूरी है।

इस चक्र के जाग्रत होने से हमारे अंदर से ईर्ष्या, मोह और डर दूर हो जाएंगे। हमारे अंदर एक आत्मबल का निर्माण होगा।

अनाहत चक्र
ह्दय के स्थान पर होता है ये चक्र। अगर कोई व्यक्ति सर्जनशील और स्चनात्मक है तो उसकी ऊर्जा इस चक्र पर होगी।

इसका मंत्र है यं

हमे इसे जाग्रत करने के लिए अपने इस चक्र पर ध्यान लगाना होगा।

इस चक्र के जागने से हमारे अंदर से कपट, हिंसा, चिंता और अंहकार नष्ट हो जाते है। हमारे अंदर प्रेम और आत्मविश्वास  बढ़ता है।

विशुद्र चक्र
इस चक्र की जगह हमारे कंठ के जगह पर होती है। जिस किसी इंन्सान की ऊर्जा इस चक्र पर स्थित होती है वो मानसिक और शारीरिक तरह से अतिशय शक्तिशाली होते है।

इसका मंत्र है हं

चक्र पर ध्यान लगाने से और कंठ पर सयंम रखना भी जरूरी है।

इस चक्र के जागने से हमारे अंदर 16 कलाओं का ज्ञान आता है। साथ में भूख, प्यास और मौसम के बदलाव पर हम नियंत्रण रख सकते है।

आज्ञा चक्र
इस चक्र का स्थान हमारे दोनों आँखों के बीच होता है। इस पर ऊर्जा स्थिर होने वाला व्यक्ति तेज दिमाग और सब कुछ जानने वाला होता है।

इसका मंत्र है उं

चक्र पर ध्यान लगाना होगा। तभी वो जाग्रत होगा।

इस चक्र के जाग्रत होने से हमारे अंदर अपार शक्ति आती है।

सहस्त्रार चक्र
ये चक्र हमारे सर के मध्यभाग में जहाँ हम चोटी रखते है वहाँ पर होता है।

इसका मंत्र है 

बहुत ज्यादा यानी की लम्बे समय तक इस चक्र पर ध्यान करने से ये जाग्रत होता है।

ये चक्र जाग्रत होने से इंसान के पास सारी शक्तिया और ज्ञान आ जाता है। लेकिन वो कभी अपनी शक्तियॉ का उपयोग नही करेगा। उस इंसान को सारा ज्ञान मिल चुका होगा।

हमारे चक्र पर असीम शक्तिया है लेकिन उसे जाग्रत करने के लिए हमे रोजाना उस पर ध्यान करना होगा। साथ में योग, व्यायाम से भी बहोत मदद मिल सकती है।

ये थे हमारे अंदर के सात महत्व के चक्रा। मिलेंगे ऐसी ही जानकारी के साथ आगे।

तब तक के लिए अलविदा।

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