Dark matter डार्क मैटर

हमे लगता है कि हमारे आसपास जो कण है उसी चीज, कण या पदार्थ से ही सारा ब्रह्मांड बना है, लेकिन ऐसा नहीं है। सच बात तो ये है कि दरअसल हम ब्रह्मांड के बहुत रहस्यों से अंजान है। तो चलिए जानते है ब्रह्मांड के एक और रहस्य के बारे मैं।
History of dark matter
डच खगोलशास्त्री जैकोबस कॅप्टेयेन ने साल 1922 में  ब्रह्मांड का निरीक्षण करते समय dark matter का सुजाव दिया था। बाद में सन 1933 में fritz jwicky ने dark matter के होने के प्रमाण दिए थे।

Effect of dark matter
देखिए अगर कोई चीज घूम रही है तो उसके केंद्र के नजदीक की सारी चीजे तेज गति से घूमेंगी और केंद्र से जो भी चीज दूर होगी वो धीमी गति से घूमनी चाहिए। जैसे की हमारी आकाशगंगा के केंद्र के नजदीक जो तारे है वो तेज गति से घूमते होंगे और जो केंद्र से दूर  है वो धीमी गति से।
लेकिन जब खगोलशास्त्रीओ ने अभ्यास किया तब पता चला की जो केंद्र के पास तारे थे उनकी जितनी गति थी उतनी ही गति केंद्र से दूर रहे तारो की थी, कंही पर तो उससे भी ज्यादा। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? वो तारे जो केंद्र से दूर थे उन्हें अबतक तो galaxy में से बहुत दूर फैक जाना चाहिए था लेकिन इसके बावजूद भी वो अपनी तेज गति से घूम रहे थे। मतलब कोई ऐसी चीज थी जो इन तारो को बंधे हुए रखती थी। और इसका कारण dark matter का गुरुत्वकर्षण बल था।

जब वैज्ञानिको ने galaxy का अभ्यास किया तो पता लगा की galaxy में इतना मांस (द्रव्यमान) पदार्थ है ही नही की जो इतना गुरुत्वाकर्षण बल उत्प्पन कर सके की सारे तारे एकसाथ रह सके। यानी की कोई चीज थी की जिसकी वजह से आकाशगंगा की रचना बनाए रखती थी। हम इसे देख नही सकते थे इसिलए इसे dark matter का नाम दिया गया।


डार्क मैटर के बारे में
हम क्यों डार्क मैटर को नही देख सकते? ये सवाल आपके मन में उठा ही होगा। डार्क मैटर कभी भी  प्रकाश से कोई भी प्रक्रिया नही करता। वो प्रकाश को ना तो absorb(शोषित) करता है, ना ही प्रकाश को reflect( परावर्तित) करता है। बस इसी कारण की वजह से हम डार्क मैटर को नहीं देख सकते।
डार्क मैटर कोई anti matter (प्रति कण) भी नही है, क्योंकि कोई भी एंटी मेटर कण के संपर्क में आते ही गायब हो जाते है और रेडिएशन छोड़ते है। लेकिन डार्क मैटर के मामले में ऐसा नही हो रहा था। मतलब एंटी मेटर और डार्क मैटर दोनों अलग ही थे।
तो पता कैसे चलेगा कि डार्क मैटर है कहाँ पर? चलिए जानते है। क्या होता है कि डार्क मेटर हमे दीखते तो नही और प्रकाश से भी कोई आतंरिक प्रक्रिया नही करते, लेकिन जब प्रकाश उसके करीब से निकलता है तब डार्क मैटर के गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से प्रकाश मुड जाता है यानी की light band होती है। 
इससे वैज्ञानिक अनुमान लगाते है कि वहाँ पर डार्क मैटर की उपलब्धि है।

Dark matter kya hai
Invisible dark matter
Dark matter की रचना
अब तक डार्क मैटर किस चीज का बना है उससे अभी हम अंजान है। अबतक इसके कोई भौतिक सबूत नहीं मिले है लेकिन इसका ब्रह्मांड पर प्रभाव यानी की असर (effect) देख सकते है। माना जाता है कि डार्क मैटर कोई अलग-दुर्लभ कणो से ही बने होंगे। वैज्ञानिको की माने तो उनका कहना है कि ये जो डार्क मैटर है ना, वो WIMP (weekly interacting massive particles) से बने है।  अब ये wimp तो सिर्फ अबतक का एक काल्पनिक कण ही है। कुछ वैज्ञानिको का मानना है कि डार्क मैटर न्युट्रोलिनोस से बने हुए है। वैसे पता नही किस चीज से बने है,  लेकिन  ये वैज्ञानिक ऐसी थियरी देते रहते है।
कुछ अलग
येले यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर पीटर वन डोककुम ने एक ऐसी गेलेक्सि (आकाशगंगा) की खोज की है जो सिर्फ डार्क मैटर से ही बनी हुई है, और इस आकाशगंगा का नाम है dragonfly 44 (ड्रैगनफ्लाई 44).
ब्रह्मांड में कुछ ऐसी गेलेक्सि भी है जिसमे डार्क मैटर नही है। इस तरह की आकाशगंगाओ को Ultra Defuse Galaxy कहा जाता है। और इनमे से एक है गैलेक्सी NGC 1052-DF2. हा, जानता हूं थोड़ा सा अजीब नाम है।
क्या आप जानते है हमारी आकाशगंगा में कितना dark matter है? हमारी गैलेक्सी में डार्क मैटर 10 गुना ज्यादा है बजाय आम कण के।
डार्क मैटर की वजह से किसी गैलेक्सी का मांस (द्रव्यमान)  200-400 गुना तक का फर्क आ सकता है।
तो ऐ थी कुछ जरूरी जानकारी dark matter(डार्क मैटर) के बारे में। जानकारी कैसी लगी वो कमेंट बॉक्स में जरूर बताना।
तब तक के लिए अलविदा।

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