Telepathy टेलेपथी

जैसे टेलिपाथी शब्द आता है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक ही विचार आता है कि टेलिपाथी का अर्थ दुसरो की के मन की बात की बात या उसके विचार को जानना, सामने वाली व्यक्ति के साथ बिना कोई बात किए उसके मन को पढ़ लेना। पर हकीकत में ऐसा नही है हां हम ऐसा कह सकते है कि telepathy से हम दूसरों के मन की बात को जान सकते है। पर उससे पहले ये जान लो की टेलिपाथी दूसरे कोई काम करने के लिए भी है। तो ऐसा कहना गलत होगा की telepathy सिर्फ मन को पढ़ने के लिए ही होता है।
तो चलिए जानते हैं थोड़ा बहुत telepathy के बारे में।

Concept of telepathy
टेलीपेथी ये दो शब्द का बना हुआ है। टेली और पथी। उसमे टेली का अर्थ दूर जैसा होता है। असल में टेलिपाथी का मूल रूप से विचारो का होता है। यानी की अपने विचारों को दूसरे के मन में भेजना या दूसरे के मन के विचारो को अपने मन से पढ़ लेना।

आपके मन में ये प्रश्न जरूर हुआ होगा की ये telepathy में होता क्या होगा? Telepathy की कला एक प्राचीन कला है और उसे अब वर्तमान समय में साबित भी किया गया है।

Scientists का टेलिपाथी के बारे में कुछ ऐसे विचार है।
हमारे मन में जो विचार आते है उसकी वजह से हमारे दिमाग में एक वाइब्रेशन होता है और उस से हमारे आसपास एक तरह के तरंगे उत्पन्न होती है। ऐ तरंगे हमारे वातावरण में विलीन हो जाती है। यानि की जब कोई इंसान सोचता है तब उससे उतपन्न हुए तरंगे वातावरण में सफर करती है।

टेलेपथी में इस तरंगे को दूसरे के मन में भेजना या फिर दूसरे के मन की तरंगें को ग्रहण करना होता है।

अब आपको यह प्रश्न जरूर हुआ होगा की ये telepathy कैसे करते है? तो चलिए जानते है।

टेलीपेथी में सिर्फ हमारे दिमाग का ही इस्तमाल होता है और इसमे शरीर का कोई शारीरिक तरह से भी कोई काम नही होता। टेलीपेथी करने के लिए बहुत सी पद्धति होती हैं जैसे की योगा से या फिर ध्यान से।


Telepathy method

देखिये टेलेपथी के लिए सबसे पहले कोई शांत जगह पर बैठे। अब टेलीपेथी करने से पहले अपने दिमाग को शांत करना जरूरी है। अपने दिमाग में आते फालतू विचारो को हो सके उतना कम कर दो। उससे हमे टेलेपथी के ऊपर एकाग्रता मिलेगी। अब आप अपने विचारों को जिस इंसान तक पहुचाना चाहते हो उसको अपने मन में visualize करो। अब आपके विचार उस इंसान तक पहुच रहे है ऐसा अनुभव करो। कुछ समय तक ऐसा करते रहे।

जब आप telepathy सिखने की शरूआत करते हो तो दो व्यक्ति का होना अच्छा है। देखिये टेलेपथी में विचारो को भेजना ओर स्वीकारना इस तरह दो कार्य होते है। जब भी टेलेपथी शरू करे तब अपने मित्र के साथ कोई शांत जगह पर बैठे। अब आप अपने मित्र को अपने विचार भेजने का प्रयत्न करो। आप मन में ऐसा सोचिए कि आपके विचार आपके मित्र तक पहुंच रहे है। आप अपने मित्र के साथ मन से जुड़े हुए हैं ऐसा अनुभव कीजिए। आपके साथ जो दूसरा आपका मित्र है वो आपके विचारों को स्वीकार करेगा।

आपके साथ जो मित्र हे उसे कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूर है। उसे अपने विचारों को कम करना होगा। जैसे उसका मन शांत होगा तो वो आपके विचारों को लेने के लिए कार्यक्षम होगा। और दूसरी बात ये की आप दोनों व्यक्ति एकदूसरे को अच्छी तरह से जानते होंने चाहिए। आप दोनों एकदूसरे की भावनाओं को समझते होने चाहिए जिससे टेलीपैथी में कोई तकलीफ नहीं होती। और उससे आप विचारो को अच्छी तरह से भेज सकते हो।

जो टेलेपथी कर रहा है उसे पहले कुछ समय ध्यान कर लेना चाहिए। इससे हमारे मन में आ रहे फालतू के विचार कम हो जाएंगे। अब आप जिसे विचार भेजना चाहते हो उसे भेजने का प्रयत्न करो। अपने अंदर एक आत्मविश्वास रखो। आप सिर्फ अपने विचारों पर ध्यान दो बाकी सभी प्रकार की चीजो को अपने मन से हटा दे। बस इतना ही आपको करना है।

अब सामने वाली व्यक्ति यानी की जो आपका मित्र है उसकी बारी है। सबसे पहले मन में आ रहे विचारो को खाली कर दे। इसके लिए ध्यान अच्छा रहेगा। अब आपको भेजे जा रहे विचारो को आपको  स्वीकारना है। इसके लिए ऐसा सोचो की उसके भेजे हुए विचार आप तक पहुंच रहे है। सिर्फ अपने मन पर ध्यान दे। आप भी अपने दोस्त के साथ मन से जुड़े हुए है ऐसा अनुभव कीजिए। ऐसा करने से आप सामने वाले की सोच को पढ़ने के लिए सक्षम होंगे।

Telepathy and mind reading
Mind waves

Mind reading
Telepathy का दूसरा भाग यानि की mind reading. टेलीपेथी के द्रारा हम किसी के भी मन को समज सकते है। जैसे की आप किसी व्यक्ति को देख कर कह देते हैं कि ये दुखी है या खुश, इसे कोई टेंसन है या फिर ये जुठ बोल रहा है। ये सब हम सिर्फ देख कर जान लेते है। mind reading में भी ऐसा ही होता है। आप आपकी सामने वाली व्यक्ति की भावनाएं भी टेलेपथी के जरिए  जान सकते है।

अब आपको मन में फिर से प्रश्न हुआ होगा की mind reading कैसे करे? Telepathy और mind reading में क्या फर्क है? देखिए टेलेपथी और mind reading दोनों एक ही है बस फर्क है तो उसके कार्य का। mind reading यानी की जब हम टेलेपथी कर रहे होते है तब जो हमारे विचारों को पढता है वो।

आप इस तरह टेलेपथी कर सकते है। पर आप ध्यान के द्रारा भी telepathy सिख सकते हो। ध्यान करने से मन शांत होता है और विचार कम होते जाते है। इसके साथ हमारी मानसिकशक्ति भी बढ़ने लगती है।

Telepathy kaise kare
Brain power

Scientific research
Mind reading के ऊपर scientists का कुछ ऐसा कहना है।
जब सामने वाला इंसान कुछ सोचता है तो mind vibration की वजह से तरंगे उतपन्न होती है जिसकी वजह से हम उसका मन जान लेते है। लेकिन ए तरंगे बहुत हल्की सी होती है। इसी लिए हमारा मन इसके लिए सक्षम होना चाहिए।

टेलेपथी के लिए दो व्यक्ति का आपस में साथ रहना जरूरी नहीं है। कोई एक इंसान भी अपने आप टेलेपथी की practice कर सकता है। परंतु इस तरह से थोड़ा ज्यादा समय लगता है और मन की शक्ति ज्यादा लगती है। हां, इसमें आपको परिणाम जरूर मिलेगा। आप पहले कुछ दिन ध्यान करे बाद में टेलेपथी करे। आपको telepathy में सरलता होगी।
इस प्रकार से आप टेलेपथी सिख सकते है।
आगे फिर मिलेंगे कुछ ऐसे टॉपिक पर।

तब तक के लिए अलविदा।

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